Home Business स्पेस से इंटरनेट पहुंचाएगा Jio! 1,600 सैटेलाइट लॉन्च की तैयारी, स्टारलिंक को...

स्पेस से इंटरनेट पहुंचाएगा Jio! 1,600 सैटेलाइट लॉन्च की तैयारी, स्टारलिंक को मिलेगी कड़ी चुनौती

17 July 2026 Fact Recorder

Business Desk:  रिलायंस जियो जल्द ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी की करीब 1,600 लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स तैनात करने की योजना को भारतीय अंतरिक्ष नियामक IN-SPACe से तकनीकी मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के बाद जियो देश का पहला स्वदेशी सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने के और करीब पहुंच गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IN-SPACe, ISRO और दूरसंचार विभाग (DoT) की वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (WPC) विंग ने जियो के प्रस्ताव का तकनीकी मूल्यांकन किया और इसे वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क के स्तर का माना।

स्टारलिंक को मिलेगी टक्कर

जियो की यह परियोजना एलन मस्क की Starlink जैसी वैश्विक सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को चुनौती दे सकती है। प्रस्ताव के मुताबिक कंपनी भारत में 4.5 से 5 टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) तक की क्षमता उपलब्ध कराने की योजना बना रही है, जो मौजूदा अनुमोदित क्षमताओं की तुलना में काफी अधिक है।

क्या होंगी सेवाएं?

जियो की योजना के तहत कई तरह की सैटेलाइट आधारित सेवाएं शुरू की जा सकती हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट
  • मोबाइल टावरों के लिए सैटेलाइट बैकहॉल
  • डायरेक्ट-टू-डिवाइस (Direct-to-Device) कनेक्टिविटी
  • फिक्स्ड सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं

इसके लिए कंपनी देशभर में 20 से 22 ग्राउंड स्टेशन स्थापित करने की भी तैयारी कर रही है।

आम लोगों को क्या होगा फायदा?

यदि यह परियोजना पूरी तरह लागू होती है, तो इसके कई बड़े फायदे मिल सकते हैं—

  • दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी और जंगल वाले इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा।
  • जहां फाइबर नेटवर्क बिछाना मुश्किल है, वहां भी तेज इंटरनेट उपलब्ध हो सकेगा।
  • आपदा के समय मोबाइल टावर बंद होने पर भी संचार सेवाएं जारी रह सकती हैं।
  • स्वदेशी नेटवर्क होने के कारण भविष्य में सैटेलाइट इंटरनेट की कीमतें प्रतिस्पर्धी रहने की उम्मीद है।
सरकार से मिलेगा नियामकीय सहयोग

रिपोर्ट के मुताबिक, जियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑर्बिटल स्लॉट और स्पेक्ट्रम अधिकार हासिल करने के लिए सरकार से सहयोग मांगा है। IN-SPACe ने भी सरकार को सुझाव दिया है कि भारत के पहले स्वदेशी नॉन-जियोस्टेशनरी (NGSO) सैटेलाइट नेटवर्क को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक नीतिगत और नियामकीय समर्थन दिया जाए।

अगर परियोजना तय योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और डिजिटल कनेक्टिविटी का दायरा देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।