13 May 2026 Fact Recorder
International Desk: S. Jaishankar ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारतीय सभ्यता के गणितीय योगदान पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति को लंबे समय तक सीमित दृष्टिकोण से देखा गया और अब समय आ गया है कि इतिहास की उन विकृतियों को सुधारा जाए।
‘शून्य से अनंत तक’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी का शीर्षक “शून्य से अनंत तक – गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान” रखा गया है। इसका आयोजन Indian Council for Cultural Relations (ICCR) और India International Centre (IIC) के सहयोग से किया गया।
यह प्रदर्शनी 15 मई तक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित रहेगी और इसका उद्देश्य भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित गणितीय अवधारणाओं की वैश्विक प्रासंगिकता को प्रदर्शित करना है।
भारतीय गणितीय विरासत को बताया वैश्विक आधार
उद्घाटन समारोह में जयशंकर ने कहा कि आधुनिक इतिहास में वैज्ञानिक उपलब्धियों को अक्सर समय और भूगोल की सीमाओं में बांधकर देखा गया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के साथ अब सांस्कृतिक पुनर्संतुलन भी जरूरी हो गया है, ताकि दुनिया को विभिन्न सभ्यताओं के योगदान की व्यापक समझ मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल अंकों और सूत्रों की नहीं, बल्कि भारत की उस बौद्धिक परंपरा की झलक है जिसने आधुनिक तकनीकी युग की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई।
शून्य से एल्गोरिदम तक भारतीय खोजों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में भारत की कई ऐतिहासिक गणितीय अवधारणाओं को इंटरैक्टिव तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- शून्य की अवधारणा
- दशमलव स्थान मान प्रणाली
- बीजगणित
- एल्गोरिदम
- खगोलीय गणनाएं
- क्रमचय-संचय (कॉम्बिनेटरिक्स)
- द्विआधारी गणना (बाइनरी एन्यूमरेशन)
- बौधायन-पायथागोरस प्रमेय
आर्यभट्ट से भास्कर तक विद्वानों का योगदान
प्रदर्शनी में Aryabhata, Brahmagupta और Bhaskara II जैसे महान गणितज्ञों के योगदान को प्रमुखता से दर्शाया गया है। साथ ही केरल के खगोल विज्ञान और गणित परंपरा को भी प्रदर्शित किया गया है।
कई देशों के राजनयिक रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में अमेरिका में भारत के राजदूत Vinay Mohan Kwatra, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत Binaya Srikanta Pradhan और फील्ड्स मेडल विजेता गणितज्ञ Manjul Bhargava सहित कई देशों के राजदूत और राजनयिक मौजूद रहे।
जयशंकर ने कहा कि आज की डिजिटल दुनिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बुनियादी संरचना में भी भारतीय गणितीय सोच की गहरी छाप दिखाई देती है।













