13 May 2026 Fact Recorder
Health Desk: महिलाओं में तेजी से बढ़ रही Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) बीमारी का नाम अब बदल दिया गया है। अब इस बीमारी को “पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवरी सिंड्रोम” (PMOS) कहा जाएगा। इस बदलाव का फैसला दुनियाभर के डॉक्टरों, मेडिकल संस्थाओं और मरीजों की राय के बाद लिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी सहमति
नई नामकरण प्रक्रिया के तहत करीब 14 हजार लोगों के सर्वे, अंतरराष्ट्रीय वर्कशॉप्स और 56 मेडिकल संगठनों की सलाह ली गई। इसके बाद PMOS नाम पर सहमति बनी। इस बदलाव की घोषणा European Congress of Endocrinology में की गई। साथ ही मेडिकल जर्नल The Lancet में भी इससे जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।
क्यों बदला गया PCOS का नाम?
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने नाम “पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम” से यह धारणा बनती थी कि हर मरीज की ओवरी में सिस्ट बनते हैं, जबकि ऐसा जरूरी नहीं है।
Safdarjung Hospital की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सलोनी के मुताबिक, इस बीमारी में हार्मोनल और मेटाबॉलिक गड़बड़ियां ज्यादा महत्वपूर्ण होती हैं। कई मरीजों में सिस्ट नहीं बनते, इसलिए बीमारी के वास्तविक स्वरूप को बेहतर तरीके से दर्शाने के लिए नया नाम PMOS रखा गया है।
उन्होंने बताया कि “मेटाबॉलिक” शब्द इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि इस बीमारी में शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया प्रभावित होना एक प्रमुख समस्या है।
कम उम्र की महिलाएं भी हो रहीं शिकार
डॉक्टरों के अनुसार अब 18 से 25 साल की युवतियों में भी PMOS के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके पीछे मुख्य वजहें हैं:
- खराब खानपान
- बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल
- बढ़ता मोटापा
- हार्मोनल असंतुलन
यदि समय रहते इस बीमारी को कंट्रोल न किया जाए तो यह बांझपन का कारण भी बन सकती है।
PMOS के प्रमुख लक्षण
- चेहरे पर पुरुषों की तरह बाल आना
- मुंहासे बढ़ना
- तेजी से वजन बढ़ना
- पीरियड्स अनियमित होना
- डायबिटीज का खतरा बढ़ना
नाम बदलने से क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नाम से बीमारी की बेहतर पहचान हो सकेगी और मरीजों को इसके वास्तविक कारणों और इलाज को समझने में मदद मिलेगी। इससे जागरूकता बढ़ने के साथ सही समय पर उपचार भी संभव हो पाएगा।













