23 July 2026 Fact Recorder
Business Desk: केंद्र सरकार की नई लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू होने के बाद भारत में चांदी के आयात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयात कम होने से घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है और इसके चलते स्थानीय प्रीमियम कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने मई 2026 से चांदी के आयात के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद जून में चांदी का आयात घटकर करीब 29 टन रह गया, जबकि जनवरी में यह 747 टन था। जून का आयात देश की वार्षिक चांदी की मांग का एक प्रतिशत से भी कम माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश बैंकों और अधिकृत आयातकों को अभी तक आवश्यक आयात लाइसेंस नहीं मिले हैं, जिससे विदेशों से चांदी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए आयात में कमी का सीधा असर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
आपूर्ति घटने के कारण घरेलू बाजार में चांदी का प्रीमियम बढ़ गया है। कारोबारियों का कहना है कि मांग फिलहाल स्थिर बनी हुई है, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यही स्थिति बनी रही तो त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बाजार में चांदी की कमी और अधिक महसूस की जा सकती है।
व्यापार जगत ने नई लाइसेंसिंग प्रक्रिया को लेकर कुछ चिंताएं भी जताई हैं। उनका कहना है कि लाइसेंस आवंटन और आयात कोटा को लेकर अभी स्पष्टता की कमी है, जिससे कारोबारियों को योजना बनाने में कठिनाई हो रही है। सरकार का कहना है कि चांदी का आयात अब ‘प्रतिबंधित आयात’ श्रेणी में है और सभी आवेदनों पर निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।













