17 July 2026 Fact Recorder
National Desk: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर के पास जुमे की नमाज को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जिला प्रशासन को आदेश की आधिकारिक प्रति अब तक प्राप्त नहीं हुई है, जिसके चलते नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान तय नहीं किया जा सका है।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है। आदेश मिलने के बाद ही यह तय होगा कि मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज के लिए परिसर के निकट कौन-सी खुली जगह उपलब्ध कराई जाएगी।
इस बीच मुस्लिम पक्ष ने भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराता है, तब भी वहां नमाज अदा की जाएगी या नहीं, इस पर अभी विचार किया जा रहा है। मुस्लिम पक्ष को आशंका है कि यदि एक बार परिसर के बाहर किसी निर्धारित स्थान पर नमाज पढ़ी गई, तो भविष्य में यही व्यवस्था स्थायी रूप से लागू मानी जा सकती है।
वहीं, हिंदू पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भोजशाला परिसर के आसपास किसी भी स्थान पर जुमे की नमाज की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
14 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों से धैर्य बनाए रखने की अपील की थी। कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला आने तक मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच भोजशाला परिसर के पास किसी खुली जगह पर जुमे की नमाज अदा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह मामले की नियमित सुनवाई कर जल्द समाधान निकालने के लिए तैयार है। साथ ही अदालत ने उन याचिकाओं पर भी विचार किया, जिनमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना गया था।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वर्तमान में इस विवादित परिसर का संरक्षण और प्रबंधन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन है।













