Home Hindi चीन-PAK समझौते पर भारत सख्त, जम्मू-कश्मीर के जिक्र से बढ़ा विवाद

चीन-PAK समझौते पर भारत सख्त, जम्मू-कश्मीर के जिक्र से बढ़ा विवाद

27 May 2026 Fact Recorder

International Desk:  भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि Jammu and Kashmir और Ladakh भारत के अभिन्न हिस्से हैं और किसी भी दूसरे देश को इस विषय पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि भारत की स्थिति पहले से स्पष्ट है और चीन-पाकिस्तान का संयुक्त बयान पूरी तरह अस्वीकार्य है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif 23 से 26 मई तक चीन दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और अन्य नेताओं से मुलाकात की। दौरे के बाद जारी संयुक्त बयान में चीन ने जम्मू-कश्मीर विवाद को “इतिहास से जुड़ा मुद्दा” बताते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत सुलझाने की बात कही।

भारत ने इसी बयान पर आपत्ति जताई और कहा कि जम्मू-कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी।

CPEC को लेकर भी भारत का विरोध

भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी China-Pakistan Economic Corridor पर भी सख्त रुख अपनाया। भारत का कहना है कि CPEC की कई परियोजनाएं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरती हैं, जो भारत का हिस्सा है। ऐसे में इन परियोजनाओं को भारत अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानता है।

भारत ने कहा कि पाकिस्तान के “अवैध कब्जे” वाले क्षेत्रों में किसी भी तरह का निर्माण या निवेश स्वीकार नहीं किया जाएगा।

क्या है 1963 का चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता?

चीन और पाकिस्तान के बीच 2 मार्च 1963 को एक सीमा समझौता हुआ था, जिसे Sino-Pakistan Boundary Agreement कहा जाता है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी (ट्रांस-काराकोरम क्षेत्र) का लगभग 5,180 वर्ग किलोमीटर इलाका चीन को सौंप दिया था।

यह क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान के पास स्थित है और भारत इसे जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है। इसी वजह से भारत ने शुरुआत से ही इस समझौते को अवैध और अमान्य बताया है।

समझौते की प्रमुख बातें

  • पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी चीन को सौंपी
  • चीन ने गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान के नियंत्रण को मान्यता दी
  • समझौते को “अस्थायी” बताया गया था
  • कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान के बाद बदलाव की बात कही गई थी
  • सीमा क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर सहमति बनी थी

भारत क्यों करता है विरोध?

भारत का कहना है कि पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिस्से को किसी दूसरे देश को सौंपने का कानूनी अधिकार नहीं था। इसलिए 1963 का समझौता भारत की नजर में गैरकानूनी है।

भारत यह भी मानता है कि चीन-पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी, खासकर CPEC और कराकोरम क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां, उसकी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाती हैं।

रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह समझौता?

इस समझौते ने चीन और पाकिस्तान के रिश्तों को मजबूत आधार दिया। बाद में Belt and Road Initiative और CPEC जैसी परियोजनाएं भी इसी सहयोग का हिस्सा बनीं।

इसके जरिए चीन को दक्षिण एशिया और कराकोरम क्षेत्र तक रणनीतिक पहुंच मिली, जबकि पाकिस्तान को आर्थिक और सामरिक समर्थन मिला। हालांकि भारत इसे अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ मानता है।