3 July 2026 Fact Recorder
Business Desk: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना सख्त रुख दोहराया है। संसदीय स्थायी समिति (वित्त) के समक्ष केंद्रीय बैंक ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स और निजी स्टेबलकॉइन्स देश की वित्तीय स्थिरता, मौद्रिक नीति और भुगतान प्रणाली के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। RBI ने सुझाव दिया कि बैंकों और अन्य विनियमित वित्तीय संस्थानों को इन परिसंपत्तियों से पूरी तरह दूर रखा जाए।
समिति के समक्ष RBI की ओर से डिप्टी गवर्नर रोहित जैन और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पी. वासुदेवन ने पक्ष रखा। यह बैठक भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति (वित्त) की वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर सातवीं बैठक थी। समिति इससे पहले आर्थिक मामलों के विभाग, वित्तीय खुफिया इकाई (FIU), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और क्रिप्टो क्षेत्र की कई निजी कंपनियों से भी जानकारी ले चुकी है।
क्रिप्टो पर प्रतिबंध को बताया वैध विकल्प
समिति को सौंपे गए अपने पृष्ठभूमि नोट में RBI ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत क्रिप्टो एसेट्स पर प्रतिबंध लगाना एक मान्य नीतिगत विकल्प है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इस दिशा में संतुलित नीति अपनाने से भुगतान प्रणाली सुरक्षित रहेगी, बैंकिंग क्षेत्र का जोखिम कम होगा और वित्तीय प्रणाली को संभावित संकट से बचाया जा सकेगा।
‘गलत सुरक्षा का एहसास’ दे सकता है नियमन
RBI ने चेतावनी दी कि यदि क्रिप्टो एसेट्स को पारंपरिक वित्तीय नियमों के तहत विनियमित किया जाता है, तो इससे लोगों के बीच यह संदेश जा सकता है कि ये सुरक्षित निवेश हैं। जबकि अधिकांश क्रिप्टो एसेट्स सट्टा आधारित हैं और उनका कोई प्रत्यक्ष आर्थिक उपयोग नहीं है। ऐसे में बैंकों की भागीदारी बढ़ने से वित्तीय प्रणाली पर जोखिम भी बढ़ सकता है।
निजी स्टेबलकॉइन्स पर भी चिंता
केंद्रीय बैंक ने निजी स्टेबलकॉइन्स को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। RBI के अनुसार, इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से भारत की मौद्रिक संप्रभुता प्रभावित हो सकती है, मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता घट सकती है और भुगतान प्रणाली में अस्थिरता पैदा हो सकती है। बैंक ने बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) की वार्षिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा स्टेबलकॉइन व्यवस्था मुद्रा की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा नहीं करती।
भारत की क्रिप्टो रैंकिंग पर भी उठाए सवाल
RBI ने उन रिपोर्टों पर भी सवाल उठाए, जिनमें भारत को दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो अपनाने वाला देश बताया गया है। केंद्रीय बैंक का कहना है कि निजी ब्लॉकचेन एनालिटिक्स पर आधारित ये रैंकिंग वास्तविक स्थिति को सही तरीके से नहीं दर्शातीं और बड़ी आबादी वाले देशों के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं।
RBI के अनुसार, फिलहाल भारत में 54 FIU-पंजीकृत क्रिप्टो सेवा प्रदाता हैं, जबकि करीब 3.93 करोड़ KYC सत्यापित उपयोगकर्ताओं के पास लगभग 20,436.59 करोड़ रुपये मूल्य की क्रिप्टो परिसंपत्तियां हैं।
डिजिटल रुपये को बताया बेहतर विकल्प
RBI ने निजी डिजिटल मुद्राओं के बजाय सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपये को सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प बताया। केंद्रीय बैंक का कहना है कि डिजिटल भुगतान और वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी निगरानी वाले डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना अधिक उपयुक्त होगा।
साथ ही RBI ने नीति निर्माताओं को सलाह दी कि सट्टा आधारित क्रिप्टो एसेट्स और टोकनाइज्ड वास्तविक वित्तीय परिसंपत्तियों, जैसे सरकारी प्रतिभूतियां और कॉर्पोरेट बॉन्ड, के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए, ताकि वित्तीय नवाचार को बढ़ावा मिले और जोखिमपूर्ण गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।













