Home Health शहरी महिलाओं में बढ़ा मोटापा, ग्रामीण इलाकों की 42% महिलाएं अब भी...

शहरी महिलाओं में बढ़ा मोटापा, ग्रामीण इलाकों की 42% महिलाएं अब भी इंटरनेट से दूर

नई दिल्ली, 1 जून 2026 Fact Recorder

Health Desk:  नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों ने देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल पहुंच से जुड़ी कई महत्वपूर्ण तस्वीरें सामने रखी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर महिलाओं और बच्चों की शिक्षा, बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार हुआ है, वहीं मोटापा, हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

शहरी महिलाओं में मोटापा बड़ी चुनौती

सर्वे के मुताबिक 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 30.7 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में हैं। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 42.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह 25.5 प्रतिशत है। पिछले NFHS-5 सर्वे में यह दर 24 प्रतिशत थी।

पुरुषों में भी मोटापे के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। 15-49 वर्ष आयु वर्ग के 27.3 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित पाए गए, जबकि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत था।

बढ़ रहा है हाई ब्लड शुगर का खतरा

15 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में हाई ब्लड शुगर या मधुमेह नियंत्रण की दवाएं लेने वाली महिलाओं की संख्या 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 21.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 16.2 प्रतिशत रही।

पुरुषों में यह आंकड़ा 20.9 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसमें शहरी क्षेत्रों का अनुपात 23.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों का 19.7 प्रतिशत है।

इंटरनेट इस्तेमाल में बढ़ोतरी, लेकिन ग्रामीण महिलाएं पीछे

रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या 52.9 प्रतिशत से बढ़कर 73.4 प्रतिशत हो गई है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों की 42 प्रतिशत से अधिक महिलाएं अब भी इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करतीं।

शहरी क्षेत्रों में 82.3 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 68.7 प्रतिशत है। पुरुषों में इंटरनेट उपयोग का प्रतिशत 80 तक पहुंच चुका है।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी

सर्वे में पाया गया कि स्वयं बैंक या बचत खाते का संचालन करने वाली महिलाओं की संख्या 78.6 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है। वहीं मोबाइल फोन का खुद उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 53.9 से बढ़कर 63.6 हो गया है।

शिक्षा में सुधार

15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 50.4 प्रतिशत महिलाएं 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक स्कूल गई हैं। पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 39.4 प्रतिशत था। पुरुषों में यह प्रतिशत 61.4 दर्ज किया गया।

बच्चों की सेहत में सुधार

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। वर्ष 2014 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 45 बच्चों की मृत्यु होती थी, जो 2024 में घटकर 28 रह गई है।

इसके अलावा डायरिया के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में डायरिया की दर 0.7 प्रतिशत से घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञ इसके पीछे बेहतर टीकाकरण और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता को प्रमुख कारण मानते हैं।

अस्पतालों में बढ़ीं डिलीवरी

देश में अब अधिकतर प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं। NFHS-6 के अनुसार 88.7 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में हुए। इनमें 83 प्रतिशत प्रसव सरकारी संस्थानों में कराए गए।

सिजेरियन (ऑपरेशन) के जरिए होने वाली डिलीवरी का प्रतिशत भी बढ़कर 17.4 हो गया है, जो पिछले सर्वे में 14.8 प्रतिशत था। शहरी क्षेत्रों में यह दर 23.4 प्रतिशत जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 14.2 प्रतिशत रही।

घरेलू हिंसा के मामलों में कमी

सर्वे के अनुसार विवाहित महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में कमी दर्ज की गई है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अभी भी अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में 22.3 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 17.5 प्रतिशत महिलाओं ने घरेलू हिंसा का सामना करने की बात कही।

प्रमुख निष्कर्ष

  • शहरी महिलाओं में मोटापा और हाई ब्लड शुगर तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी, खासकर महिलाएं, अभी भी डिजिटल पहुंच से वंचित हैं।
  • महिलाओं की शिक्षा, बैंकिंग और मोबाइल उपयोग में सुधार हुआ है।
  • बच्चों की मृत्यु दर और डायरिया के मामलों में कमी आई है।
  • संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग बढ़ा है।

NFHS-6 की रिपोर्ट संकेत देती है कि भारत में स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के कई क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन जीवनशैली संबंधी बीमारियों और डिजिटल असमानता जैसी चुनौतियां अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।