19 May 2026 Fact Recorder
Education Desk: NEET पेपर लीक मामले में CBI जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी को पता चला है कि मुख्य आरोपी शुभम खैरनार के पास परीक्षा से करीब एक हफ्ते पहले यानी 27 अप्रैल को ही प्रश्नपत्र पहुंच गया था। इसके बाद पेपर का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान तक फैल गया।
CBI जांच में सामने आया है कि शुभम खैरनार का सबसे पहले उत्तर प्रदेश के कुछ लोगों से संपर्क हुआ, जिसके बाद हरियाणा के जरिए पेपर राजस्थान के सीकर पहुंचा। वहां से इसे अलग-अलग राज्यों में भेजा गया। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपियों के बीच संपर्क टेलीग्राम ऐप के जरिए किया जाता था।
जानकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्र मिलने के बाद शुभम दो दिन तक नासिक से बाहर रहा। जांच एजेंसियां नासिक, अहिल्यानगर और पुणे तक इस नेटवर्क के तार जुड़े होने की आशंका जता रही हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि 27 से 30 अप्रैल के बीच NEET पेपर 15 से 20 लाख रुपये में बेचा गया हो सकता है। साथ ही यह संदेह भी जताया जा रहा है कि 3 मई से पहले ही पेपर की डील शुरू हो चुकी थी।
इधर CBI ने नांदेड़ के कदम परिवार को एक बार फिर पुणे कार्यालय में पूछताछ के लिए बुलाया है। आरोप है कि परिवार ने अपनी बेटी के लिए 5 लाख रुपये में पेपर खरीदा था। जांच में यह भी सामने आया है कि परिवार पुणे के एक एजेंट के संपर्क में था, जिसके जरिए आर्थिक लेनदेन किया गया।
बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी से पूछताछ के दौरान कदम परिवार का नाम सामने आया। CBI के मुताबिक, पहले कम अंक लाने वाली छात्रा को मॉक टेस्ट में अचानक 560 अंक तक मिलने लगे थे, जिसके बाद शक गहराया। फिलहाल एजेंसी इस पूरे रैकेट में आर्थिक लेनदेन और जुड़े लोगों की गहन जांच कर रही है।













