19 May 2026 Fact Recorder
Chandigarh Desk: Enforcement Directorate ने पंजाब में कथित CLU (चेंज ऑफ लैंड यूज) घोटाले की जांच तेज कर दी है। अब जांच का दायरा सिर्फ बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के एक पूर्व मुख्य सचिव और Punjab Real Estate Regulatory Authority (रेरा) के पूर्व चेयरमैन की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे संकेत मिलते हैं कि कई विवादित रियल एस्टेट परियोजनाओं को मंजूरी देने में शीर्ष स्तर पर हस्तक्षेप हुआ था। इसी आधार पर दोनों पूर्व अधिकारियों को जल्द पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
ईडी ने 8 और 9 मई को मोहाली, न्यू चंडीगढ़ और खरड़ में छापेमारी की थी। इस दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी को शक है कि संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल में कई ऐसे प्रोजेक्ट्स को रेरा पंजीकरण और विपणन की अनुमति दी गई, जिनमें भूमि स्वामित्व, लाइसेंस और CLU रिकॉर्ड से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं थीं।
जांच के केंद्र में The Indian Cooperative House Building Society Limited भी शामिल है। इस सोसाइटी ने वर्ष 2014 में पलहेड़ी और रहमांपुर गांवों की करीब 123 एकड़ जमीन पर कॉलोनी विकसित करने के लिए आवेदन किया था। बाद की जांच में पता चला कि प्रस्तावित जमीन के बड़े हिस्से पर सोसाइटी का सीधा मालिकाना नहीं था। कई जमीन मालिकों ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के जरिए मंजूरियां हासिल की गईं।
ईडी अब पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व रेरा चेयरमैन के कार्यकाल की फाइलों, नोटशीट और मंजूरी आदेशों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ प्रोजेक्ट्स को तकनीकी आपत्तियों के बावजूद बैकडोर से मंजूरी दी गई।
मामले में करीब 150 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का भी आरोप है। निवेशकों से रकम लेने के बावजूद कई लोगों को न तो प्लॉट मिले और न ही रजिस्ट्री दी गई। एजेंसी को शक है कि यह पैसा Suntec City, ला कैनेला और डिस्ट्रिक्ट-7 जैसे प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर किया गया।
ईडी फिलहाल ब्लैक मनी, फर्जी दस्तावेजों और चंडीगढ़ से दिल्ली तक हुए आर्थिक लेनदेन की कड़ियों की भी जांच कर रही है।













