19 May 2026 Fact Recorder
Business Desk: देश में घरों और मंदिरों में बड़ी मात्रा में रखा निष्क्रिय सोना अब अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सकता है। सरकार को ‘बुलियन बैंक’ बनाने का प्रस्ताव मिला है, जिसका मकसद घरेलू सोने को बाजार में लाकर गोल्ड इंपोर्ट पर निर्भरता कम करना है।
भारत हर साल अपनी जरूरत पूरी करने के लिए करीब 700 से 800 टन सोना विदेशों से आयात करता है। इस पर लगभग 7 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। इसी को देखते हुए All India Jewellers and Goldsmith Federation ने केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal को बुलियन बैंकिंग सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव सौंपा है।
इस प्रस्ताव के तहत घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में पड़े सोने को बैंकिंग व्यवस्था के जरिए बाजार में लाया जाएगा। इससे ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और एक्सपोर्टर्स को घरेलू स्तर पर ही सोना उधार पर मिल सकेगा और उन्हें विदेशों से नया सोना मंगाने की जरूरत कम पड़ेगी।
मौजूदा व्यवस्था में लोग या तो बैंक लॉकर में सोना रखते हैं या फिर उसके बदले गोल्ड लोन लेते हैं। ऐसे में सोना निष्क्रिय बना रहता है। लेकिन बुलियन बैंक मॉडल में यही सोना बाजार में इस्तेमाल होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति देगा।
ज्वेलर्स फेडरेशन का मानना है कि इस मॉडल से देश में मजबूत गोल्ड सप्लाई चेन विकसित होगी। इसके लिए सरकार से एक संयुक्त पैनल बनाने की भी मांग की गई है, जिसमें नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह पैनल बुलियन बैंकिंग सिस्टम के लिए पारदर्शी और सुरक्षित नियम तैयार करेगा, ताकि लोगों का भरोसा इस नई व्यवस्था पर बना रहे।













