August 28,2026 Fact Recorder
Punjab Desk: पंजाब के रायकोट के गांव बसियां में सांप के डसने से भाई-बहन की दर्दनाक मौत हो गई। छह वर्षीय जसप्रीत कौर की मंगलवार देर रात हुई मौत के बाद बुधवार रात उसके आठ वर्षीय भाई जोबनप्रीत सिंह ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में शोक की लहर है।
जानकारी के अनुसार, जसप्रीत कौर और जोबनप्रीत सिंह मंगलवार रात परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर के आंगन में सो रहे थे। देर रात करीब तीन बजे जोबनप्रीत ने उठकर अपनी दादी को बताया कि उसे किसी चीज ने काट लिया है। चारपाई के नीचे देखने पर वहां सांप दिखाई दिया।
इसके बाद परिजन जोबनप्रीत को तत्काल सिविल अस्पताल रायकोट लेकर पहुंचे। उसकी हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे लुधियाना के सीएमसी अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, बुधवार रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
वहीं, बुधवार सुबह करीब पांच बजे जसप्रीत कौर की तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे सिविल अस्पताल रायकोट लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
दोनों भाई-बहन का अंतिम संस्कार गुरुवार को बेहद गमगीन माहौल में किया गया। बच्चों की मौ*त से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों की आंखें भी नम हो गईं। रक्षाबंधन से पहले हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि परिवार की इस मुश्किल घड़ी में कोई प्रशासनिक अधिकारी या राजनीतिक प्रतिनिधि उनके साथ दुख साझा करने नहीं पहुंचा।
एंबुलेंस की रफ्तार को लेकर परिवार ने उठाए सवाल
परिवार ने आरोप लगाया कि जोबनप्रीत को सीएमसी अस्पताल ले जाने में एंबुलेंस को करीब डेढ़ से दो घंटे लग गए। परिजनों के मुताबिक, एंबुलेंस चालक शुरुआत में करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चला रहा था। उनका कहना है कि मुल्लांपुर से आगे जाने के दौरान जोबनप्रीत की हालत बिगड़ गई और वह बेसुध हो गया, जिसके बाद एंबुलेंस की रफ्तार बढ़ाई गई।
रायकोट सिविल अस्पताल में एंटी-वेनम उपलब्ध नहीं होने का आरोप
परिवार ने रायकोट सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में सांप के काटने के इलाज के लिए जरूरी एंटी-वेनम इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था।
परिवार के मुताबिक, जोबनप्रीत को अस्पताल लाने के बाद करीब दो घंटे तक उचित इलाज नहीं मिल सका और इसके बाद उसे सीएमसी अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर इलाज और एंटी-वेनम उपलब्ध हो जाता तो शायद बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।
हालांकि, एंटी-वेनम की उपलब्धता, इलाज में हुई देरी और एंबुलेंस की गति को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।













