August 28,2026 Fact Recorder
International Desk: नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर सैटेलाइट तस्वीरों से अहम जानकारी सामने आई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की शुरुआती जांच के मुताबिक, करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लांगतांग लिरुंग ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया। इससे भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हुई और रास्ते में आने वाली कई चीजें इसकी चपेट में आ गईं।
एनआरएससी ने घटना से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना कर ग्लेशियर टूटने के क्षेत्र की पहचान की है। केंद्र के निदेशक प्रकाश चौहान के अनुसार, 26 अगस्त को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 10:30 बजे प्राप्त लैंडसैट-9 की तस्वीरों में ग्लेशियर के टूटने और ढहने का क्षेत्र स्पष्ट नजर आया। वहीं, 24 अगस्त की सेंटिनल-2 तस्वीर में इसी इलाके में ग्लेशियर मौजूद दिखाई देता है। बाद की तस्वीर में वहां बर्फ और चट्टानों से बने बड़े मलबे का क्षेत्र दिखाई दिया।
5,200 मीटर की ऊंचाई से 1,200 मीटर नीचे आया हिमखंड
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के अनुसार, ग्लेशियर से टूटकर निकला हिमखंड करीब 1,200 मीटर नीचे की ओर खिसका। तेज ढलान पर गुरुत्वाकर्षण के कारण बर्फ और चट्टानों की गति बढ़ती गई। इस दौरान बड़ी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर आया, जिसने भोटेकोशी नदी में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया।
बाढ़ के बाद भोटेकोशी नदी का प्रवाह सामान्य चैनल की तुलना में काफी चौड़ा दिखाई दिया। नदी का पानी आसपास की घाटी में फैल गया। विशेषज्ञों के अनुसार, भारी मलबे और बड़े-बड़े बोल्डरों के नदी में पहुंचने से बाढ़ का प्रभाव और ज्यादा विनाशकारी हो गया।
भूस्खलन और मलबे ने बढ़ाई तबाही
ग्लेशियर टूटने के साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन भी हुआ। भारी मात्रा में चट्टान, बर्फ और मलबा नदी में पहुंचा। अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट कंपनी प्लैनेट लैब्स की घटना से पहले और बाद की तस्वीरों की विशेषज्ञ समीक्षा में भी पहाड़ी ढलानों में बड़े बदलाव दिखाई दिए। हरे-भरे पहाड़ी हिस्सों का बड़ा क्षेत्र बाद में भूरे मलबे और तलछट से ढका नजर आया।
एनआरएससी की प्रारंभिक जांच में यह संभावना भी जताई गई है कि मलबे के कारण नदी के संकरे हिस्से में कुछ समय के लिए अस्थायी अवरोध बना हो। इसके पीछे पानी और मलबा जमा होने के बाद अचानक इसके मुक्त होने से बाढ़ की तीव्रता बढ़ी हो सकती है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन अभी जारी है।
भूकंप से ग्लेशियर टूटने का क्या है कनेक्शन?
आपदा से पहले नेपाल के रसुवा जिले में भूकंप भी आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार, बुधवार सुबह भारतीय समयानुसार करीब 8:22 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है।
अब वैज्ञानिक यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या भूकंप के झटकों ने ग्लेशियर के अस्थिर हिस्से को प्रभावित किया था। हालांकि, फिलहाल ग्लेशियर टूटने और भूकंप के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है। इस संबंध में विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आए शुरुआती संकेतों ने नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन, मलबे और नदी के प्रवाह में अचानक बदलाव की एक संभावित पूरी तस्वीर सामने रखी है।













