August 28,2026 Fact Recorder
National Desk: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 29 अगस्त से शुरू होने वाली उज्बेकिस्तान और किर्गिजस्तान यात्रा को भारत की मध्य एशिया नीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस दौरान पीएम मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और कई वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं।
भारत मध्य एशियाई देशों के साथ रणनीतिक, रक्षा और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। SCO बैठक में आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं।
29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान, 31 अगस्त से किर्गिजस्तान दौरा
प्रधानमंत्री मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे, जबकि 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिजस्तान की राजधानी बिश्केक का दौरा करेंगे। उज्बेकिस्तान की यह उनकी चौथी यात्रा होगी।
SCO की बैठक संगठन की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है। भारत 2017 से इस संगठन का पूर्ण सदस्य है। सम्मेलन में पीएम मोदी सुरक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े भारत के दृष्टिकोण को सामने रख सकते हैं।
बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की भी मौजूदगी रहेगी। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना फिलहाल नहीं बताई गई है। वहीं, पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कुछ अन्य नेताओं से मुलाकात की संभावना है।
SCO के संयुक्त बयान पर रहेगी नजर
SCO सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति की भी भागीदारी होगी। ऐसे में बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान पर विशेष नजर रहेगी। पश्चिम एशिया और ईरान से जुड़े मौजूदा घटनाक्रम का भी इसमें उल्लेख होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा रूस, चीन और ईरान के राष्ट्राध्यक्षों का आगामी दिनों में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का कार्यक्रम है। ऐसे में बिश्केक की बैठक को आने वाले समय की कूटनीतिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2027 में पाकिस्तान के पास होगी SCO की अध्यक्षता
बिश्केक सम्मेलन के दौरान SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपी जाएगी। इसके बाद वर्ष 2027 में SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में आयोजित किया जा सकता है।
इससे पहले 2023 में भारत ने SCO की अध्यक्षता की थी। उस दौरान पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी भारत आए थे, जबकि शिखर सम्मेलन का आयोजन ऑनलाइन किया गया था।
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से जब पाकिस्तान की अध्यक्षता में होने वाले SCO सम्मेलन में भारत की भागीदारी को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैसला सही समय पर किया जाएगा।
मध्य एशिया से कनेक्टिविटी में चाबहार पोर्ट अहम
विदेश मंत्रालय ने भारत और मध्य एशिया के बीच कनेक्टिविटी को भी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि मध्य एशिया की भारत तक भरोसेमंद, सुरक्षित और व्यावसायिक रूप से लाभकारी पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र के साथ कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाओं पर काम कर रहा है और चाबहार पोर्ट इस दिशा में महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।
पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत मध्य एशिया के साथ रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।













