Home Hindi फर्जी वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री की मांग पर...

फर्जी वकीलों पर सुप्रीम कोर्ट गंभीर, राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री की मांग पर केंद्र और BCI को नोटिस

19 June 2026 Fact Recorder

National Desk: देश में फर्जी वकीलों के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने वकीलों के लिए आधार की तर्ज पर एक राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई शुरू करते हुए केंद्र सरकार, Bar Council of India और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

याचिका में मांग की गई है कि देश के प्रत्येक पंजीकृत वकील को एक विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान संख्या (National Lawyer Identifier) प्रदान की जाए, जिससे फर्जी वकालत करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

मामले की सुनवाई करते हुए Justice Surya Kant और Justice V. Mohan की पीठ ने कहा कि यह प्रस्ताव नवोन्मेषी प्रतीत होता है और आधुनिक तकनीक की मदद से इसे लागू किया जा सकता है।

अदालत ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, University Grants Commission तथा अन्य संबंधित संस्थाओं को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होने की संभावना है।

क्या है याचिका की मांग?

यह याचिका Bar Association of India द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि देशभर में वकालत के पेशे में फर्जी लोगों की घुसपैठ एक गंभीर समस्या बन चुकी है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि एक डिजिटल रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक वकील का सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे अदालतों, मुवक्किलों और संस्थाओं को वास्तविक वकीलों की पहचान करने में आसानी होगी।

इसके साथ ही अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49 के तहत वकीलों के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल आचार संहिता तैयार करने की मांग भी की गई है।

कानून विश्वविद्यालयों की भूमिका पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कानून की शिक्षा देने वाले विश्वविद्यालयों और संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसलिए कानून विश्वविद्यालयों को भी इस मामले में पक्षकार बनाए जाने की जरूरत हो सकती है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि यूजीसी को पहले ही मामले में पक्षकार बनाया जा चुका है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

यदि राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री का प्रस्ताव लागू होता है, तो देश में वकीलों के सत्यापन की एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित हो सकती है। इससे फर्जी डिग्री, गलत पहचान और अवैध रूप से वकालत करने वाले लोगों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

साथ ही न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और आम नागरिकों का भरोसा मजबूत करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।