11 May 2026 Fact Recorder
National Desk: भारतीय वायुसेना पश्चिमी सीमा पर अपनी हवाई शक्ति को और मजबूत करने की तैयारी में है। स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A के पहले चार स्क्वाड्रनों को राजस्थान के फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य पाकिस्तान सीमा के पास त्वरित जवाबी कार्रवाई की क्षमता बढ़ाना और युद्ध जैसी परिस्थितियों में लगातार ऑपरेशन सुनिश्चित करना है।
सूत्रों के अनुसार, बीकानेर स्थित नाल एयरफोर्स स्टेशन को तेजस Mk1A का प्रमुख बेस बनाया जाएगा। यहां पहले और तीसरे स्क्वाड्रन की तैनाती होगी, जो लंबे समय से सेवा दे रहे MiG-21 बाइसन विमानों की जगह लेंगे।
वहीं, फालोदी एयरफोर्स स्टेशन दूसरे तेजस Mk1A स्क्वाड्रन का केंद्र बनेगा। यहां नए लड़ाकू विमानों की जरूरतों को देखते हुए बड़े पैमाने पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। आने वाले समय में नाल और फालोदी एयरबेस पश्चिमी सेक्टर में हल्के लड़ाकू विमानों के प्रमुख ऑपरेशनल हब बन जाएंगे।
वायुसेना की नई रणनीति के तहत सीमा के नजदीक तेजस Mk1A की तैनाती से दुश्मन की किसी भी गतिविधि पर तेजी से प्रतिक्रिया देना संभव होगा। इससे क्विक रिएक्शन अलर्ट क्षमता मजबूत होगी और अधिक संख्या में लड़ाकू मिशन संचालित किए जा सकेंगे।
तेजस Mk1A आधुनिक तकनीकों से लैस है। इसमें AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, लंबी दूरी की Astra BVR मिसाइल और हवा में ईंधन भरने की क्षमता जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ये सभी तकनीकें इसे पुराने MiG-21 की तुलना में अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाती हैं।
इन विमानों की तैनाती से पहले नाल और फालोदी एयरबेस पर व्यापक निर्माण कार्य किए गए हैं। इनमें हार्डनड एयरक्राफ्ट शेल्टर, अत्याधुनिक मेंटेनेंस हैंगर और मिशन प्लानिंग सेंटर शामिल हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में विमानों को सुरक्षित और लगातार ऑपरेशनल रखा जा सके।
भारतीय वायुसेना ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से कुल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देगा और रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करने में मदद करेगा।













