3 June 2026 Fact Recorder
National Desk: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच का दायरा अब झारखंड तक पहुंच गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने संकेत दिए हैं कि छत्तीसगढ़ में जिन अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनके झारखंड से जुड़े मामलों की भी गहन जांच की जाएगी। दोनों राज्यों के शराब कारोबार से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार, झारखंड के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में लागू की गई नई उत्पाद नीति में छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाया गया था। आरोप है कि इस दौरान छत्तीसगढ़ से जुड़े कुछ कारोबारी और कंपनियां झारखंड के शराब कारोबार में शामिल हुईं और उन्हें विभिन्न स्तरों पर लाभ पहुंचाया गया।
ईडी ने झारखंड में शराब घोटाले से संबंधित दो अलग-अलग ईसीआईआर (इन्फोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज कर रखी हैं। इनमें एक मामला रायपुर की आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जबकि दूसरा मामला झारखंड एसीबी द्वारा 20 मई 2025 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। दोनों मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि कथित रूप से कमीशन के बदले छत्तीसगढ़ से जुड़े आरोपितों को झारखंड के शराब कारोबार में प्रवेश दिलाया गया। प्लेसमेंट एजेंसियों और शराब आपूर्ति कंपनियों को भी कार्य आवंटित किए गए। बाद में इन कंपनियों पर करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के आरोप लगे, जिसके चलते कुछ एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट भी किया गया।
ईडी ने इस मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे और उनसे जुड़े कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की है। साथ ही, फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर शराब दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराने वाली एजेंसियों के संचालकों से भी पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी अब दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और गवाहों के बयान जुटाकर विशेष अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। ईडी ने छत्तीसगढ़ में जिन कंपनियों—दीशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और ओम साईं बिवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड—को आरोप पत्र में शामिल किया है, उन्हें झारखंड में भी भुगतान किया गया था। बताया जाता है कि वर्ष 2022 में शराब आपूर्ति करने वाली इन कंपनियों को नवंबर 2024 में करीब 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
वहीं, दूसरी ओर छत्तीसगढ़ सिंडिकेट से जुड़ी चार ब्लैकलिस्टेड प्लेसमेंट एजेंसियों पर झारखंड सरकार का 450 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। इस राशि की वसूली का मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
ईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, झारखंड और छत्तीसगढ़ के शराब कारोबार से जुड़े कई नए पहलुओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।













