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दवाओं के कच्चे माल के दाम में 150% तक उछाल, फार्मा उद्योग की बढ़ी चिंता

September 29,2026 Fact Recorder

Himachal Desk:  दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण और मरीजों को समय पर दवाएं उपलब्ध कराने की चुनौती के बीच फार्मास्यूटिकल कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने फार्मा उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। दवाओं में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट (API), क्रिटिकल मैटीरियल, केमिकल और पैकेजिंग सामग्री के दाम पिछले कुछ महीनों में 40 से 150 प्रतिशत तक बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (IDMA) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुमित सिंगला ने केंद्र सरकार से फार्मा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में लाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों के साथ-साथ इसके परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है। API और अन्य जरूरी सामग्री महंगी होने से दवा कंपनियों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।

एसीटोन, मेथेनॉल समेत कई रसायनों के दाम बढ़े

बताया जा रहा है कि एसीटोन, मेथेनॉल और आइसोप्रोपिल अल्कोहल जैसे प्रमुख रसायनों की कीमतों में भी 40 से 150 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इससे दवा निर्माताओं पर लागत का दबाव बढ़ रहा है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

पैरासिटामोल और मेटफार्मिन की सप्लाई पर असर की आशंका

यदि कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो पैरासिटामोल, मेटफार्मिन और हृदय रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

वहीं, सरकारी सप्लाई और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं होने की स्थिति में दवा कंपनियों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अनुबंध संबंधी दायित्वों और संभावित हर्जाने का भी सामना करना पड़ सकता है।