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पानी का संकट बनेगा 20 लाख करोड़ का मौका! वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में खुलेंगे निवेश और कमाई के नए रास्ते

3 July 2026 Fact Recorder

Business Desk:  देश में बढ़ते जल संकट के बीच वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए बड़े कारोबारी अवसर उभर रहे हैं। एक ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 10 वर्षों में भारत को जल आपूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग और जल भंडारण जैसी परियोजनाओं पर करीब 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इससे इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए लंबी अवधि की विकास संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है, जबकि देश के पास वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक मांग के कारण जल प्रबंधन देश की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है।

2030 तक मांग होगी दोगुनी

अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से लगभग दोगुनी हो सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए पेयजल आपूर्ति, सीवेज ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, डिसैलिनेशन (समुद्री पानी को मीठा बनाना), जल भंडारण और वितरण नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का वॉटर और वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी बाजार वित्त वर्ष 2025 में करीब 3 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2031 तक 5.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस दौरान बाजार में लगभग 10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि (CAGR) का अनुमान है।

सरकार का बड़ा निवेश

जल क्षेत्र में सरकारी योजनाएं भी इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं। जल जीवन मिशन के लिए हर साल लगभग 67,000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है, जबकि वित्त वर्ष 2026 में जल शक्ति मंत्रालय को करीब 99,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

इसके अलावा, AMRUT 2.0 योजना के तहत शहरी जल आपूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं के लिए लगभग 2.99 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं नमामि गंगे फेज-II के तहत सीवेज ट्रीटमेंट और नदी पुनर्जीवन के लिए 22,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

सीवेज ट्रीटमेंट में सबसे बड़ा अवसर

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में प्रतिदिन लगभग 72,000 मिलियन लीटर (MLD) सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि उपचार (ट्रीटमेंट) की क्षमता केवल 27,000 MLD के आसपास है। यानी करीब 70 प्रतिशत सीवेज बिना उपचार के ही रह जाता है। यही कारण है कि सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर इस क्षेत्र का सबसे बड़ा अवसर माना जा रहा है।

इन कंपनियों पर रहेगी नजर

ब्रोकरेज रिपोर्ट के अनुसार, कई सूचीबद्ध कंपनियां इस निवेश चक्र से लाभ उठा सकती हैं।

  • VA Tech Wabag के पास लगभग 17,200 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जो उसके अनुमानित वार्षिक राजस्व का करीब 4.4 गुना है। कंपनी ने आने वाले वर्षों में 15–20 प्रतिशत राजस्व वृद्धि का अनुमान जताया है।
  • Enviro Infra Engineers के पास 6,814 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जो अगले दो वर्षों के लिए मजबूत राजस्व दृश्यता प्रदान करता है। कंपनी ने हाल के वर्षों में राजस्व और मुनाफे में तेज वृद्धि दर्ज की है।
  • Denta Water and Infra Solutions के पास करीब 728 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जिसमें लगभग 73 प्रतिशत परियोजनाएं सरकारी जल प्रबंधन योजनाओं से जुड़ी हैं।

लंबी अवधि की ग्रोथ की संभावना

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि लगातार सरकारी निवेश, सख्त पर्यावरणीय नियम, तेज शहरीकरण और उद्योगों में पानी की बढ़ती मांग के चलते वॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आने वाले वर्षों में निवेश और कारोबार के लिहाज से सबसे अहम क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। इससे इस क्षेत्र की कंपनियों को लंबे समय तक नए प्रोजेक्ट और कमाई के अवसर मिलने की उम्मीद है।