नई दिल्ली, 1 जून 2026 Fact Recorder
Business Desk: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं के बीच भारत की प्रमुख उपभोक्ता वस्तु (FMCG) कंपनियों ने अपने कारोबार को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक रणनीतियां अपनानी शुरू कर दी हैं। उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने और लागत बढ़ने की आशंका को देखते हुए कंपनियां अब नए उत्पादन केंद्र विकसित करने और सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने पर जोर दे रही हैं।
डाबर, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और इमामी जैसी कंपनियों ने पश्चिम एशिया पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए उत्पादन और सोर्सिंग नेटवर्क में बदलाव किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य संभावित उत्पाद कमी और मूल्य वृद्धि के जोखिम को कम करना है।
डाबर ने अपनी क्षेत्रीय सप्लाई चेन का एक हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात के रास-अल-खैमाह से हटाकर भारत, मिस्र और तुर्की में स्थानांतरित कर दिया है। कंपनी ने इन नए उत्पादन केंद्रों से निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग भी विकसित किए हैं। हालांकि इससे लागत बढ़ने की संभावना है, लेकिन कंपनी ने आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को देखते हुए यह निर्णय लिया है।
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने भी बड़ा बदलाव करते हुए पश्चिम एशिया और उत्तरी अमेरिका के लिए उत्पादन को ओमान से गुजरात के मुंद्रा स्थित संयंत्र में स्थानांतरित कर दिया है। कंपनी का कहना है कि यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने और निर्यात को सुचारू बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने भी अपनी खरीद रणनीति में बदलाव करते हुए प्लास्टिक ढक्कनों और पीईटी सामग्री की आपूर्ति के स्रोतों को विविध बनाया है। कंपनी के खाद्य व्यवसाय को पहले पश्चिम एशिया के रास्ते अमेरिका को होने वाले निर्यात में बाधाओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब शिपिंग व्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
इमामी ने भी अपनी उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था में संशोधन किया है। कंपनी पश्चिम एशिया में बेचे जाने वाले कई उत्पादों का निर्माण स्थानीय स्तर पर करती थी, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के कारण उसे उत्पादन में कटौती करनी पड़ी। हालांकि कंपनी का कहना है कि अप्रैल में कारोबार में सुधार देखने को मिला है और आने वाले महीनों में स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता ने कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और लचीला बनाने के लिए मजबूर किया है। इसके तहत उत्पादन केंद्रों का विस्तार, नए शिपिंग मार्गों का उपयोग और वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, कंपनियां संभावित महंगाई, कच्चे माल की कमी और आपूर्ति बाधाओं से बचने के लिए पहले से तैयारी कर रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं तक उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित न हो और कारोबार सुचारू रूप से चलता रहे।













