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ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों में बोलने में देरी का खतरा, PGIMER रिसर्च में खुलासा

29 अप्रैल 2026 Fact Recorder

Health Desk:  आजकल छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल और लैपटॉप देना आम होता जा रहा है, लेकिन इसका असर उनके विकास पर पड़ सकता है। हाल ही में Post Graduate Institute of Medical Education and Research की एक रिसर्च में सामने आया है कि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों में बोलने में देरी (स्पीच डिले) का कारण बन सकता है।

इस अध्ययन में 18 से 24 महीने के 140 स्वस्थ बच्चों को शामिल किया गया। रिसर्च के मुताबिक, जो बच्चे रोजाना एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन का उपयोग करते हैं, उनमें सामान्य बच्चों की तुलना में बोलने में देरी का खतरा अधिक पाया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि 18 महीने की उम्र से पहले बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना चाहिए। शुरुआती साल मस्तिष्क के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर उनके मानसिक और भाषाई विकास को प्रभावित कर सकता है।

रिसर्च में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों में स्पीच डिले की समस्या ज्यादा देखी गई, उनमें से कई को 18 महीने से पहले ही स्क्रीन का इस्तेमाल कराया जाने लगा था। इससे उनके कम्युनिकेशन स्किल्स और सामाजिक व्यवहार पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन टाइम बिल्कुल नहीं देना चाहिए। केवल जरूरत पड़ने पर सीमित समय के लिए वीडियो कॉल की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल या टीवी का सहारा लेना सही नहीं है।

कुल मिलाकर, बच्चों के बेहतर विकास के लिए जरूरी है कि उन्हें स्क्रीन से दूर रखकर बातचीत, खेल और सामाजिक गतिविधियों में शामिल किया जाए।