29 अप्रैल 2026 Fact Recorder
Health Desk: पपीता सेहत के लिए बेहद फायदेमंद फल माना जाता है, लेकिन बाजार में इसकी गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। अधिक मुनाफा कमाने के लिए कई जगहों पर पपीते को केमिकल की मदद से जल्दी पकाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आप जो पपीता खरीद रहे हैं, वह प्राकृतिक रूप से पका है या कृत्रिम तरीके से।
Food Safety and Standards Authority of India के अनुसार, फलों को जल्दी पकाने के लिए Calcium Carbide का उपयोग प्रतिबंधित है। यह नमी के संपर्क में आकर जहरीली गैस छोड़ता है, जिसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे तत्व हो सकते हैं, जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कैसे पहचानें केमिकल से पका पपीता?
1. रंग से पहचान
प्राकृतिक रूप से पका पपीता हल्के पीले से नारंगी रंग का होता है और उसका रंग एक समान फैला होता है। वहीं केमिकल से पका पपीता ऊपर से बहुत चमकीला दिख सकता है, लेकिन उस पर हरे धब्बे नजर आते हैं।
2. खुशबू पर ध्यान दें
नेचुरली पका पपीता हल्की मीठी खुशबू देता है। अगर पपीते में कोई खास सुगंध नहीं है या अजीब गंध आ रही है, तो वह केमिकल से पका हो सकता है।
3. छिलके की बनावट
असली पका पपीता दबाने पर हल्का मुलायम महसूस होता है, जबकि केमिकल से पका पपीता या तो ज्यादा सख्त होता है या असमान रूप से नरम।
4. अंदर का गूदा देखें
कटने पर अगर पपीते का गूदा सख्त, फीका या बेस्वाद लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह कृत्रिम रूप से पकाया गया है। प्राकृतिक पपीता अंदर से रसदार और मीठा होता है।
5. जल्दी खराब होना
केमिकल से पके पपीते जल्दी सड़ जाते हैं या अंदर से खराब निकल सकते हैं, जबकि प्राकृतिक पपीता कुछ समय तक ताजा रहता है।
निष्कर्ष:
फल खरीदते समय थोड़ी सावधानी बरतकर आप अपनी सेहत को नुकसान से बचा सकते हैं। हमेशा ऐसे पपीते चुनें जो प्राकृतिक रूप से पके हों और दिखने में संतुलित रंग व खुशबू लिए हों।













