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Power corporation Chief engineer Vimal Negi family reached High Court CBI Inquiry demand Shimla | हाईकोर्ट पहुंचे विमल नेगी के परिजन: सरकार पर नहीं रहा भरोसा, CBI को केस सौंपने का आग्रह, पत्नी ने दायर की याचिका – Shimla News

हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले में परिजन हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। परिजनों ने याचिका दायर कर अदालत से इस केस की जांच केंद्रीय एजेंसी CBI को सौंपने का आग्रह किया है। यह याचिका विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी की तरफ से दायर

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विमल नेगी के भाई एससी नेगी ने बताया कि उन्हें पुलिस जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। विमल नेगी 10 मार्च से लापता थे, जबकि पोस्टमॉर्टम में उनकी मौत तीन दिन बताई गई है। ऐसे में तीन दिन तक वह कहां रहे, पुलिस इस बात का पता नहीं लगा पाई।

चीफ इंजीनियर विमल नेगी के शव के साथ पावर कॉरपोरेशन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए परिजन (फाइल फोटो)

चीफ इंजीनियर विमल नेगी के शव के साथ पावर कॉरपोरेशन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए परिजन (फाइल फोटो)

उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट से देसराज की बेल रिजेक्ट होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया। डायरेक्टर देसराज जब अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो हिमाचल सरकार की ओर से कोई भी वकील सुप्रीम कोर्ट में उसकी बेल का विरोध करने के लिए खड़ा नहीं हुआ। जब विमल नेगी का शव मिला, तो परिजनों को मौके पर नहीं बुलाया गया। उन्होंने बताया, पुलिस जांच पर उन्हें बिल्कुल भरोसा नहीं है।

विमल नेगी के शव के साथ 19 मार्च को पावर कॉरपोरेशन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए परिजन और निगम के कर्मचारी (फाइल फोटो)

विमल नेगी के शव के साथ 19 मार्च को पावर कॉरपोरेशन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए परिजन और निगम के कर्मचारी (फाइल फोटो)

देसराज और 2 IAS के खिलाफ एफआईआर

बता दें कि चीफ विमल नेगी के परिजनों ने पावर कॉरपोरेशन के एमडी हरिकेश मीणा, डायरेक्टर देसराज और दूसरे डायरेक्टर शिवम प्रताप सिंह पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। परिजनों द्वारा विमल नेगी के शव के साथ 19 मार्च को पावर कॉरपोरेशन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद पुलिस ने डायरेक्टर देसराज के खिलाफ न्यू शिमला पुलिस थाना में एफआईआर की। इसके अलावा एमडी और डायरेक्टर पर्सनल के खिलाफ भी एफआईआर की गई। इसके बाद पुलिस जांच जारी हैं।

ACS की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई

इसी तरह मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा से भी इस मामले की जांच कराई गई। ओंकार शर्मा इस केस की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप चुके हैं। मगर अब तक रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। हालांकि सूत्र बताते हैं कि परिजनों ने प्रताड़ना के जो आरोप लगाए थे, वो जांच में सही पाए गए है।