Gujrat 30 May 2026 Fact Recorder
National Desk : जामनगर स्थित वनतारा वन्यजीव बचाव और पुनर्वास केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने वनतारा परियोजना के खिलाफ दायर नई याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जिन मुद्दों की पहले ही जांच हो चुकी है, उन्हें दोबारा उठाकर नई जांच की मांग नहीं की जा सकती।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पहले ही कर चुका है और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप चुका है।
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्राजील, वेनेजुएला, चेक गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका से वनतारा लाए गए पशुओं के स्थानांतरण को पूरी तरह वैध माना। अदालत ने कहा कि सभी पशुओं को वैध दस्तावेजों, CITES परमिट और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) की मंजूरी के बाद भारत लाया गया था।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इन पशुओं का स्थानांतरण किसी व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं किया गया था, बल्कि “जू से जू” (Zoo-to-Zoo) व्यवस्था के तहत संरक्षण और देखभाल के उद्देश्य से किया गया था। अदालत ने माना कि पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय CITES नियमों के अनुरूप संपन्न हुई।
वनतारा प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने वन्यजीवों के बचाव, पुनर्वास और संरक्षण से जुड़े कार्यों को कानूनी, नैतिक और पारदर्शी माना है। साथ ही, परियोजना के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को भी खारिज कर दिया गया है।













