18 June 2026 Fact Recorder
International Desk: पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान ने शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ भी दस्तावेज पर अपनी सहमति दे चुके थे। ईरान ने भी आधिकारिक तौर पर समझौते की पुष्टि करते हुए कहा है कि अब इसकी वास्तविक परीक्षा क्रियान्वयन के दौरान होगी।
समझौते की प्रमुख शर्तें
प्रस्तावित समझौते में कुल 14 महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली सुनिश्चित करना है।
सबसे महत्वपूर्ण शर्त के तहत अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमत हुए हैं। दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या बल प्रयोग की धमकी से भी परहेज करेंगे।
समझौते में दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने तथा आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम व्यापक समझौते पर बातचीत पूरी करने का लक्ष्य रखा है, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
नाकाबंदी हटेगी, व्यापारिक मार्ग खुलेंगे
एमओयू लागू होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकाबंदी और अन्य प्रतिबंधात्मक उपायों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। 30 दिनों के भीतर समुद्री व्यापार को युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके साथ ही ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन पर क्षेत्रीय देशों के साथ बातचीत भी प्रस्तावित है।
ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की योजना
समझौते के तहत अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार ईरान के आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का पैकेज तैयार करेंगे। इस योजना की रूपरेखा 60 दिनों के भीतर तय की जाएगी।
साथ ही आवश्यक वित्तीय लेनदेन, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों के लिए अमेरिका विशेष लाइसेंस और छूट उपलब्ध कराएगा।
प्रतिबंध हटाने और संपत्तियां लौटाने का वादा
अमेरिका ने अंतिम समझौते के तहत ईरान पर लगाए गए सभी प्रमुख आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंध भी शामिल होंगे।
इसके अलावा अमेरिका द्वारा रोकी गई या जब्त की गई ईरानी संपत्तियों और फंड को वापस करने का भी प्रावधान रखा गया है।
परमाणु कार्यक्रम पर सख्त निगरानी
समझौते में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। संवर्धित यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में नष्ट किया जाएगा।
अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार नहीं करेगा, जबकि अमेरिका नए प्रतिबंध लगाने या अतिरिक्त सैन्य बल तैनात करने से बचेगा।
संयुक्त निगरानी तंत्र बनेगा
समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य के अंतिम समझौते के अनुपालन की निगरानी के लिए एक संयुक्त कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समर्थन देने की भी योजना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के संबंधों में नया अध्याय खोलेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति दे सकता है।











