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हरियाणा के 52 गांवों के सर्वे में खुलासा: अंतरराज्यीय विवाह वाले परिवारों के बच्चे झेल रहे सामाजिक भेदभाव और पहचान का संकट

📚 हरियाणा के 52 गांवों के सर्वे में बड़ा खुलासा।

6 July 2026 Fact Recorder

Haryana Desk: हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में अंतरराज्यीय विवाह करने वाले परिवारों के बच्चों को सामाजिक भेदभाव, पहचान के संकट और भविष्य को लेकर अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है। यह बात पोलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ व्रोकला द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, इन युवाओं के सामने केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियां भी मौजूद हैं।

52 गांवों में किया गया सर्वे

शोधकर्ताओं ने हरियाणा के नारनौल क्षेत्र के 52 गांवों में 497 परिवारों का सर्वेक्षण किया। इस अध्ययन में 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 76 युवाओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों, ग्राम सरपंचों और सरकारी अधिकारियों से भी बातचीत की गई।

शिक्षा को मान रहे बेहतर भविष्य की कुंजी

अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं, फिर भी अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनका मानना है कि अच्छी शिक्षा और स्थानीय संस्कृति के साथ बेहतर जुड़ाव बच्चों की सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य में विवाह और रोजगार के अवसर भी बेहतर बना सकता है।

सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां

सर्वेक्षण में शामिल 497 परिवारों के 738 बच्चों में अधिकांश युवा हैं। कई परिवारों के पास स्थायी रोजगार नहीं है और सीमित शिक्षा के कारण लगभग 96 प्रतिशत माताएं स्वयं सहायता समूहों से भी नहीं जुड़ सकी हैं। इससे इन परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है।

पहचान और स्वीकार्यता की समस्या

अध्ययन में शामिल युवाओं ने बताया कि उन्हें समाज में अपनी पहचान बनाने और स्वीकार्यता हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई युवाओं ने सामाजिक भेदभाव और बहिष्कार के अनुभव भी साझा किए। उनके अनुसार, भविष्य विशेषकर विवाह को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती है।

विशेषज्ञों की सिफारिश

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में बहुसांस्कृतिक परिवार सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं। इन केंद्रों के माध्यम से ऐसे परिवारों और उनके बच्चों को शिक्षा, मनोवैज्ञानिक परामर्श, रोजगार मार्गदर्शन और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जा सके, जिससे वे समाज की मुख्यधारा से बेहतर तरीके से जुड़ सकें।