August 22,2026 Fact Recorder
Business Desk: त्योहारों से पहले देश में चीनी की कीमतों में तेजी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई बाजारों में चीनी का खुदरा भाव 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के भारत लाने की मंजूरी दी है।
करीब एक दशक बाद ऐसा मौका आया है जब घरेलू बाजार की जरूरत पूरी करने के लिए भारत को चीनी का आयात करना पड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाकर बाजार में कीमतों पर दबाव कम करना है।
चीनी महंगी होने की बड़ी वजह क्या है?
चीनी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में उपलब्धता पर बढ़ता दबाव माना जा रहा है। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान के मुताबिक करीब 306 लाख मीट्रिक टन रह सकता है, जबकि शुरुआती अनुमान इससे अधिक था।
गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों से नुकसान पहुंचने की भी बात सामने आई है। इसके अलावा मौसम को लेकर चिंता ने आने वाले सीजन के उत्पादन पर भी सवाल खड़े किए हैं।
कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता
चीनी उत्पादन के लिए गन्ने की फसल और पर्याप्त बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। इस साल मानसून कमजोर रहने की आशंका के चलते गन्ने की बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर बारिश कमजोर रहती है और गन्ने की अगली फसल प्रभावित होती है तो आने वाले वर्षों में चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है। अल नीनो का संभावित प्रभाव भी बाजार के लिए जोखिम माना जा रहा है।
त्योहारों में बढ़ सकती है चीनी की मांग
रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा बिस्किट, टॉफी, शीतल पेय और कई अन्य खाद्य उत्पादों में भी चीनी का इस्तेमाल होता है।
ऐसे में यदि बाजार में पहले से ही आपूर्ति सीमित हो और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ जाए, तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
क्या एथेनॉल उत्पादन भी जिम्मेदार है?
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है कि एथेनॉल के लिए चीनी डायवर्ट करने के कारण मौजूदा महंगाई बढ़ी है।
सरकार के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 9 प्रतिशत रह गई। साथ ही मौजूदा समय में भारत के कुल एथेनॉल उत्पादन का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गन्ने के बजाय अनाज, खासकर मक्के से आता है।
सरकार का कहना है कि मौजूदा कीमतों में तेजी की मुख्य वजह कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी मांग और जमाखोरी है।
महाराष्ट्र, यूपी और कर्नाटक पर टिकी चीनी की आपूर्ति
भारत में चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। 2025-26 सीजन में महाराष्ट्र ने करीब 89.80 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश ने 65.60 लाख मीट्रिक टन और कर्नाटक ने 41.70 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन किया।
तीनों राज्य मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन का करीब 87 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। इसलिए इन राज्यों में गन्ने की फसल, बारिश और मिलों का उत्पादन पूरे देश में चीनी की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने 10 लाख टन चीनी आयात का फैसला क्यों लिया?
बाजार में कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को बिना आयात शुल्क के भारत लाने की अनुमति दी है। सामान्य तौर पर चीनी के आयात पर करीब 100 प्रतिशत शुल्क लगता है, लेकिन इस विशेष व्यवस्था के तहत तय मात्रा में कच्ची चीनी शुल्क-मुक्त आयात की जा सकेगी।
यह आयात 31 अक्तूबर 2026 तक किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और मांग-आपूर्ति के बीच अंतर को कम करना है।
चीनी कहां से आएगी?
भारत के लिए ब्राजील चीनी का प्रमुख आयात स्रोत रहा है। 2024 में भारत ने बड़ी मात्रा में कच्ची गन्ने की चीनी ब्राजील से आयात की थी। इस बार भी ब्राजील से आयात होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में करीब दो महीने लग सकते हैं। इसलिए आयात का असर बाजार में तुरंत दिखाई देने के बजाय आने वाले महीनों में देखने को मिल सकता है।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है। इसके अलावा मिठाई, बिस्किट, टॉफी, पेय पदार्थ और चीनी का इस्तेमाल करने वाले अन्य खाद्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी। एक सप्ताह पहले यह 50.98 रुपये, एक महीने पहले 48.18 रुपये और एक साल पहले 46.30 रुपये प्रति किलो थी।
यानी एक साल में औसत कीमत करीब 9.40 रुपये प्रति किलो, एक महीने में 7.52 रुपये और सिर्फ एक सप्ताह में 4.72 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है।
फिलहाल सरकार के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर तब साफ होगा जब आयातित चीनी घरेलू बाजार में पहुंचनी शुरू होगी।













