September 24,2026 Fact Recorder
Business Desk: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1 फीसदी तक टूट गए। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा, इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े IRDAI के प्रस्तावों के कारण बीमा कंपनियों के शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
102 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल शामिल रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतों में तेजी से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई को लेकर भी चिंता पैदा हो सकती है। इसका असर शेयर बाजार के निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई चिंता
अमेरिकी बाजार से मिले संकेत भी भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए सकारात्मक नहीं रहे। अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11 फीसदी के स्तर तक पहुंच गई।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का असर वैश्विक इक्विटी बाजारों पर पड़ सकता है। ऊंची यील्ड के माहौल में निवेशकों के लिए बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं, जिससे जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव बढ़ता है।
इंश्योरेंस शेयरों में भारी बिकवाली
गुरुवार के कारोबार में फाइनेंशियल और इंश्योरेंस सेक्टर के कई शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। HDFC Life, SBI Life Insurance, Bajaj Finance, Axis Bank, Shriram Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयर दबाव में रहे।
इंश्योरेंस कंपनियों में गिरावट की एक वजह IRDAI का प्रस्तावित नियामकीय बदलाव भी माना जा रहा है। नियामक ने डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन और Expenses of Management (EoM) की सीमा को लेकर कंसल्टेशन पेपर जारी किया है।
प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी लागत और भुगतान व्यवस्था को अधिक नियंत्रित करना है। बाजार में आशंका है कि इससे कुछ कंपनियों के मार्जिन और कमाई पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से इंश्योरेंस शेयरों में निवेशकों की बिकवाली बढ़ी।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी जारी
जहां प्रमुख इंडेक्स और कई लार्ज-कैप शेयर दबाव में नजर आए, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में कुछ हद तक खरीदारी का रुझान बना रहा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, इन सेगमेंट में घरेलू निवेशकों से लगातार लिक्विडिटी देखने को मिल रही है।
हालांकि, ऊंचे वैल्युएशन के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम भी बना हुआ है। यदि कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो इन शेयरों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?
फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और IRDAI के प्रस्तावित नियमों पर बनी हुई है। इन मोर्चों पर आगे होने वाले बदलाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।













