November 6,2026 Fact Recorder
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा और चंबा जिलों में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह-सुबह धरती में हुई हलचल से क्षेत्र में एक बार फिर भूकंप की संवेदनशीलता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गई।
भूकंप सुबह 6 बजकर 59 मिनट पर आया। इसका केंद्र जमीन के भीतर करीब 15 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। हालांकि, यह कम तीव्रता का भूकंप था, लेकिन हिमाचल के इस क्षेत्र का भूकंप से जुड़ा पुराना इतिहास लोगों को 1905 की विनाशकारी त्रासदी की याद दिलाता है।
1905 में भूकंप ने मचाई थी भारी तबाही
कांगड़ा का इतिहास भूकंप की एक बेहद दर्दनाक घटना से जुड़ा हुआ है। 4 अप्रैल 1905 को सुबह करीब 6 बजकर 20 मिनट पर आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे क्षेत्र को तबाह कर दिया था। इस भूकंप की तीव्रता लगभग 7.8 से 8.0 के बीच आंकी गई थी।
इस प्राकृतिक आपदा में हजारों मकान ढह गए थे और 18 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी। कुछ ऐतिहासिक और सरकारी अभिलेखों में मृतकों की संख्या 20 हजार से अधिक भी बताई गई है।
धर्मशाला, कांगड़ा और आसपास के इलाकों में भारी नुकसान हुआ था। कांगड़ा शहर की अधिकांश इमारतें जमींदोज हो गई थीं, जबकि धर्मशाला में भी बड़े पैमाने पर भवन क्षतिग्रस्त हुए थे। यह भूकंप भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में गिना जाता है।
कांगड़ा-चंबा क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील
हिमाचल प्रदेश का अधिकांश पर्वतीय इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। कांगड़ा और चंबा सहित राज्य के कई जिले उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं।
हिमालय की भूगर्भीय संरचना और सक्रिय टेक्टोनिक प्रक्रियाओं के कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं। केंद्र सरकार की ओर से जुलाई 2026 में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, कांगड़ा-चंबा-धर्मशाला क्षेत्र भूकंपीय जोन-V में शामिल है। यह देश का सबसे अधिक भूकंपीय जोखिम वाला जोन है।
क्या 3.2 तीव्रता का भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत है?
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल छोटे भूकंप आने के आधार पर किसी बड़े भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। शुक्रवार सुबह आया 3.2 तीव्रता का भूकंप भी 1905 जैसी किसी बड़ी आपदा का संकेत नहीं माना जा सकता।
हालांकि, इस तरह के झटके भूकंप के प्रति सतर्क रहने और पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण की आवश्यकता को जरूर रेखांकित करते हैं।
भूकंप आने पर बरतें ये सावधानियां
भूकंप के झटके महसूस होने पर घबराने के बजाय सुरक्षा के उपाय अपनाने चाहिए।
घर के अंदर हों तो मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे बैठकर सिर और गर्दन को सुरक्षित रखें।
खिड़कियों, शीशों और भारी सामान से दूर रहें।
भूकंप के दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल न करें।
झटके रुकने के बाद सावधानीपूर्वक खुले स्थान पर जाएं।
इमारतों और बिजली के तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
कांगड़ा की धरती ने वर्ष 1905 में भूकंप की भयावह तबाही देखी थी। यह इतिहास आज भी याद दिलाता है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन जागरूकता, भूकंपरोधी निर्माण और समय रहते तैयारी से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।













