Home Himachal हिमाचल में ग्लेशियल झीलों का बढ़ा खतरा, 562 से बढ़कर 1,000 के...

हिमाचल में ग्लेशियल झीलों का बढ़ा खतरा, 562 से बढ़कर 1,000 के पार पहुंची संख्या; GLOF का भी मंडराया संकट

August 29,2026 Fact Recorder

Himachal Desk:  नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद हिमाचल प्रदेश में भी ग्लेशियल झीलों के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता गहरा गई है। विधानसभा के मानसून सत्र में इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में जोखिम पैदा करने वाली ग्लेशियल झीलों की संख्या वर्ष 2019 में 562 थी, जो अब बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है।

हिमाचल में सबसे ज्यादा हाई रिस्क ग्लेशियल झीलें

देशभर में चिन्हित 48 उच्च जोखिम वाली ग्लेशियल झीलों के हिमाचल प्रदेश में होने की बात सामने आई है। हिमकोस्टा, इसरो और एनडीएमए के उपग्रह अध्ययनों के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग नदी बेसिनों में ग्लेशियल झीलों का विस्तार तेजी से हो रहा है।

  • सतलुज बेसिन: 750 से अधिक ग्लेशियल झीलें, जिनमें किन्नौर, स्पीति और पारडू क्षेत्र प्रमुख हैं।
  • चिनाब बेसिन: 250 से अधिक झीलें, विशेष रूप से चंद्रा, भागा, मियार और घेपांग घाटियों में।
  • व्यास बेसिन: 90 से अधिक झीलें, मुख्य रूप से कुल्लू की पार्वती उप-घाटी में।
  • रावी बेसिन: 60 से अधिक झीलें, जो चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित हैं।
तेजी से सिकुड़ रहे हिमाचल के ग्लेशियर

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नेपाल में हुई आपदा को पूरे हिमालयी क्षेत्र में गहराते जलवायु संकट का संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण सतलुज, व्यास, रावी और चिनाब नदी बेसिन में ग्लेशियर तेजी से सिकुड़ रहे हैं।

ग्लेशियरों के पिघलने से ग्लेशियल झीलों का आकार बढ़ रहा है। इससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि किसी झील की प्राकृतिक रोकथाम अचानक टूटती है तो बड़ी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बह सकता है, जिससे निचले इलाकों में जान-माल और सड़क, पुल समेत अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

वैज्ञानिकों के साथ स्थिति की लगातार समीक्षा

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ग्लेशियर विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के साथ लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है। सरकार का प्रयास है कि संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुरक्षात्मक और बचाव संबंधी कदम उठाए जा सकें।

नेपाल में हालिया प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी राज्यों में बदलते मौसम के पैटर्न और जलवायु संकट को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश भी वर्ष 2023-24 के दौरान गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ता तापमान, ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और मौसम में हो रहे बदलाव आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश समेत पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।