27 May 2026 Fact Recorder
Chandigarh Desk: Chandigarh में चर्चित रिश्वतखोरी मामले में आरोपी ओपी राणा पर कानूनी शिकंजा और कसता जा रहा है। अदालत ने उनके खिलाफ एक बार फिर गैर-जमानती वारंट जारी किया है। हालांकि फिलहाल उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
मामले में बुधवार को Punjab and Haryana High Court में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है। यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती और वह जांच में शामिल नहीं होते, तो जांच एजेंसियां उन्हें घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं।
कैसे सामने आया मामला?
पूरा मामला 8 मई को सामने आया था, जब Abohar निवासी अमित कुमार ने विजिलेंस विभाग के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। अमित कुमार वर्तमान में स्टेट टैक्स ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि ठेकेदार राघव गोयल और उनके पिता विकास गोयल उर्फ विक्की गोयल विजिलेंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर बिचौलिये के तौर पर काम कर रहे थे।
13 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपियों ने कहा था कि विजिलेंस मुख्यालय में लंबित शिकायत का निपटारा कराने के लिए रिश्वत देनी होगी। आरोप है कि यह रकम Sharad Satya Chauhan और उनके रीडर ओपी राणा के नाम पर मांगी जा रही थी।
शिकायत मिलने के बाद Central Bureau of Investigation (CBI) ने मामले की जांच शुरू की। जांच और शिकायत सत्यापन की जिम्मेदारी सीबीआई एसीबी चंडीगढ़ के इंस्पेक्टर अरुण अहलावत को सौंपी गई।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता से 13 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।
मोबाइल फोन की भी हुई मांग
CBI जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नकद रकम के अलावा ओपी राणा के लिए एक मोबाइल फोन की मांग भी की गई थी। बाद में सीबीआई ने राघव गोयल और विकास गोयल को 13 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर लिया।
अब पूरे मामले में सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। अदालत के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।













