August 19,2026 Fact Recorder
Himachal Desk: हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार भारी तबाही लेकर आया है। 30 जून से अब तक 50 दिनों के दौरान राज्य में मानसून से जुड़ी आपदाओं और सड़क हादसों में 197 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 81 मौतें सीधे तौर पर बारिश और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी हैं, जबकि 116 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है। वहीं राज्य में मानसून से हुआ कुल आर्थिक नुकसान 1,001.71 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है।
88 सड़कें अभी भी बंद
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार शाम तक हिमाचल में 88 सड़कें बंद थीं। सुबह यह संख्या 105 थी, लेकिन दिनभर चले बहाली कार्यों के बाद इसमें कमी आई।
मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां 32 सड़कें बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 25 और सिरमौर में 10 सड़कें बंद हैं।
बिजली और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित
भारी बारिश और भूस्खलन का असर बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा है। सुबह 36 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर खराब थे, जिनकी संख्या शाम तक घटकर 12 रह गई। हमीरपुर में नौ, शिमला में दो और कुल्लू में एक ट्रांसफॉर्मर प्रभावित है।
इसके अलावा बारिश के कारण राज्य की 19 जलापूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। इनमें हमीरपुर की 12, शिमला की पांच और बिलासपुर की दो योजनाएं शामिल हैं।
बारिश और आपदाओं से 81 मौ*तें
30 जून से अब तक प्राकृतिक और मौसम संबंधी आपदाओं में 81 लोगों की जान गई है। इनमें रॉकस्लाइड और चट्टान खिसकने से 28, भूस्खलन से 14, डूबने से 5, सांप के काटने से 8 और बिजली का करंट लगने से 8 मौतें शामिल हैं।
आपदा से सबसे ज्यादा 14 मौ*तें लाहौल-स्पीति में दर्ज की गईं। इसके बाद कांगड़ा में 13 और शिमला में 12 लोगों की मौत हुई।
सड़क हादसों में 116 लोगों की मौ*त
मानसून के दौरान सड़क हादसे भी जानलेवा साबित हुए हैं। राज्य में अब तक सड़क दुर्घटनाओं में 116 लोगों की मौत हुई है। इनमें सबसे ज्यादा 17 मौतें सिरमौर में हुईं, जबकि चंबा में 16 लोगों ने जान गंवाई।
85 इमारतें पूरी तरह तबाह
मानसून की आपदा से निजी संपत्ति और पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक 85 इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, जबकि 314 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इस दौरान 429 पशुओं की मौत हुई है और 313 लोग घायल हुए हैं। कांगड़ा में एक व्यक्ति के लापता होने की भी जानकारी है।
राज्य को कुल 1,001.71 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है। इसमें लोक निर्माण और सिंचाई विभाग को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
प्रशासन ने जारी की सावधानी की अपील
प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें खोलने, बिजली बहाल करने और अन्य राहत कार्यों में जुटी हैं। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
अधिकारियों ने लोगों और पर्यटकों से भारी बारिश के दौरान नदी-नालों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की है। साथ ही यात्रा से पहले सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है, क्योंकि बारिश के कारण रास्ते दोबारा बंद हो सकते हैं।













