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कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल, 90 डॉलर के पार पहुंचा भाव; तेल कंपनियों को फायदा, टेक शेयरों पर दबाव

August 19,2026 Fact Recorder

Business Desk:  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक बाजारों पर दिखाई देने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। महंगे तेल से जहां ऊर्जा कंपनियों को फायदा हो रहा है, वहीं महंगाई की चिंता के चलते दुनिया भर के शेयर बाजारों में दबाव बढ़ गया है।

एनर्जी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल

तेल की बढ़ती कीमतों का सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों को मिल रहा है। एसएंडपी 500 का एनर्जी सेक्टर इंडेक्स करीब 1.8 फीसदी चढ़कर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। जुलाई में निचले स्तर पर पहुंचे कई एनर्जी शेयरों में अब करीब 21 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली है।

अमेरिकी तेल दिग्गज कंपनियों शेवरॉन और एक्सॉनमोबिल की कमाई में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दूसरी तिमाही में शेवरॉन की कमाई करीब 240 फीसदी और एक्सॉनमोबिल के मुनाफे में करीब 115 फीसदी की वृद्धि हुई। सप्लाई संकट के कारण रिफाइनरी कंपनियों को भी ऊंचे मार्जिन का फायदा मिल रहा है।

तनाव लंबा खिंचने की आशंका से निवेशकों की रणनीति बदली

कुछ समय पहले निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। इसी उम्मीद के चलते ऊर्जा कंपनियों के शेयरों पर दबाव आया था। हालांकि, तनाव के बढ़ने के बाद निवेशकों का रुख बदल गया है।

बाजार में अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मध्य पूर्व में सप्लाई बाधित रहने से लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। इसी वजह से निवेशक ऊर्जा क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं।

महंगे तेल से महंगाई का खतरा

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का दूसरा पहलू वैश्विक महंगाई है। तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण अमेरिकी शेयर बाजार में भी बिकवाली देखने को मिली। एसएंडपी 500 में 0.7 फीसदी और नैस्डैक में 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

टेक कंपनियों के शेयरों पर दबाव

महंगे तेल और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच टेक कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव बढ़ा। एनवीडिया और इंटेल जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 4.70 फीसदी के पार पहुंच गई, जो जून 2007 के बाद का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है। वहीं, लंदन का FTSE 100 अपेक्षाकृत मजबूत रहा। बाजार में ऊर्जा कंपनियों का बड़ा भार होने के कारण बीपी और शेल जैसी कंपनियों की तेजी ने इंडेक्स को सहारा दिया।

कुल मिलाकर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ऊर्जा कंपनियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं, लेकिन लंबे समय तक ऊंचे तेल भाव रहने से महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ सकती है।