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12 दिन में मोबाइल स्नैचिंग केस का फैसला, तकनीक आधारित जांच से दिल्ली पुलिस को मिली बड़ी सफलता

28 May 2026 Fact Recorder

National Desk: राजधानी दिल्ली में मोबाइल स्नैचिंग के एक मामले में दिल्ली पुलिस ने महज 12 दिनों के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से दोषी करार दिलाकर त्वरित न्याय का उदाहरण पेश किया है। यह सफलता आईपी एस्टेट थाना पुलिस की सतर्कता, तकनीक आधारित जांच और प्रभावी अभियोजन के चलते संभव हो सकी।

पुलिस के मुताबिक आरोपी मोहम्मद आदिल (22), निवासी तकिया काले खां, मीर दर्द रोड, दिल्ली को FIR नंबर 197/2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 304(2) और 317(2) के तहत दोषी ठहराया गया है।

जानकारी के अनुसार, 14 मई 2026 को अलीगढ़ निवासी एक टैक्सी चालक यात्रियों को छोड़ने के बाद गांधी मार्केट गोल चक्कर, मीर दर्द रोड के पास अपनी टैक्सी में बैठा अगली बुकिंग का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान आरोपी उसका Redmi Note 13 Pro मोबाइल फोन छीनकर भागने लगा।

पीड़ित ने तुरंत शोर मचाते हुए आरोपी का पीछा किया। उसी समय इलाके में गश्त कर रहे आईपी एस्टेट थाने के कांस्टेबल राहुल ने आरोपी को भागते देखा और पीछा कर मौके पर ही पकड़ लिया। आरोपी के कब्जे से छीना गया मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया गया।

सूचना मिलने पर जांच अधिकारी हेड कांस्टेबल नदीम मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने नए आपराधिक कानूनों के तहत वैज्ञानिक और तकनीक आधारित जांच प्रक्रिया अपनाते हुए ई-साक्ष्य ऐप के जरिए बरामदगी और जब्ती की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की। यह प्रक्रिया BNSS की धारा 105 के तहत पूरी की गई, जिससे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सकी।

दिल्ली पुलिस ने घटना के केवल चार दिन के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी आईपी एस्टेट थाने के एक अन्य आपराधिक मामले में शामिल रह चुका है। मामले की निगरानी ACP राजीव भारद्वाज ने की, जबकि SHO इंस्पेक्टर नरेश कुमार, SI एस.एन. ओझा और ASI राजकुमार ने जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुकदमे के दौरान सरकारी वकील राघव खुराना ने अदालत में गवाहों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पेश किया। सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने 26 मई 2026 को आरोपी को दोषी करार दे दिया।

दिल्ली पुलिस ने इसे तकनीक आधारित जांच, नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और पुलिस-अभियोजन के बेहतर समन्वय का सफल उदाहरण बताया है, जिससे पीड़ित को त्वरित न्याय मिल सका।