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39 की उम्र में भी मेसी का जादू बरकरार, दो असिस्ट से इंग्लैंड को हराकर अर्जेंटीना को फाइनल में पहुंचाया

16 July 2026 Fact Recorder

Sports Desk:  फुटबॉल में बढ़ती उम्र अक्सर खिलाड़ियों की रफ्तार और प्रभाव को कम कर देती है, लेकिन अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अनुभव और शानदार फुटबॉल IQ किसी भी टीम की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। 39 वर्षीय मेसी ने फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ गोल नहीं किया, लेकिन दो बेहतरीन असिस्ट देकर अर्जेंटीना को लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

पहले हाफ में इंग्लैंड ने मेसी को बांधे रखा

इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल ने मेसी को रोकने के लिए विशेष रणनीति अपनाई। इलियट एंडरसन, जूड बेलिंगहम और डेक्लान राइस ने मिलकर उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसका असर भी दिखा और पहले हाफ में मेसी ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके। दूसरे हाफ की शुरुआत में एंथनी गॉर्डन के गोल से इंग्लैंड ने बढ़त भी हासिल कर ली।

पोजिशन बदली और बदल गया पूरा मैच

इंग्लैंड के बढ़त लेने के बाद मेसी ने अपनी पोजिशन बदली और दाईं विंग की ओर खेलने लगे। इस बदलाव से इंग्लैंड की रक्षापंक्ति बिखर गई और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की जगह मिलने लगी। मेसी ने अपनी बेहतरीन पासिंग और गेम रीडिंग से लगातार हमले तैयार किए, जिससे मैच का पूरा रुख बदल गया।

दो असिस्ट से बने जीत के सबसे बड़े नायक

अर्जेंटीना का पहला गोल मेसी की शानदार समझ का नतीजा था। उन्होंने सही समय पर एंजो फर्नांडीज को ऐसा पास दिया, जिसने इंग्लैंड की डिफेंस को पूरी तरह चीर दिया और स्कोर 1-1 हो गया। इसके बाद इंजरी टाइम में मेसी ने गेंद को बाहर जाने से बचाते हुए शानदार क्रॉस दिया, जिस पर लाउतारो मार्टिनेज ने विजयी गोल दागकर अर्जेंटीना को फाइनल में पहुंचा दिया।

हालांकि मेसी पूरे मैच में गोल नहीं कर सके और उनका एक्सपेक्टेड गोल (xG) केवल 0.01 रहा, लेकिन उन्होंने चार गोल के मौके बनाए, जिनमें दो सीधे गोल में बदले। यही उनकी मैच पर पकड़ और प्रभाव को दर्शाता है।

अब रफ्तार नहीं, अनुभव से जीतते हैं मुकाबले

अपने करियर के शुरुआती दौर में मेसी अपनी तेज ड्रिब्लिंग और गोल स्कोरिंग के लिए मशहूर थे, लेकिन अब उनका खेल पूरी तरह बदल चुका है। वे विरोधी खिलाड़ियों को अपनी ओर खींचकर साथियों के लिए जगह बनाते हैं और सही समय पर निर्णायक पास देकर मैच का परिणाम बदल देते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 11 में से 9 सफल ड्रिब्लिंग कीं, जिनका उद्देश्य गोल करना नहीं बल्कि विपक्षी टीम की रक्षात्मक संरचना को तोड़ना था।

विश्व कप में फिर रचा इतिहास

इंग्लैंड के खिलाफ पूरे 120 मिनट खेलने वाले मेसी ने इस मुकाबले के साथ विश्व कप में अपने असिस्ट की संख्या 12 तक पहुंचा दी, जो एक नया रिकॉर्ड है। वहीं छह विश्व कप में उनके 21 गोल उनकी महानता की गवाही देते हैं। अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने भी टीम को इस तरह तैयार किया है कि एंजो फर्नांडीज, एलेक्सिस मैक एलिस्टर, रोड्रिगो डी पॉल और जूलियन अल्वारेज जैसे खिलाड़ी अधिक दौड़-भाग करें, जबकि मेसी निर्णायक मौकों के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखें।

अब स्पेन से होगी खिताबी जंग

सेमीफाइनल में इंग्लैंड को हराने के बाद अब अर्जेंटीना की नजर विश्व कप खिताब बचाने पर है। फाइनल में उसकी भिड़ंत स्पेन से होगी, जहां एक ओर अनुभवी लियोनेल मेसी होंगे तो दूसरी ओर लामिन यामाल, पाउ कुबार्सी और दानी ओल्मो जैसे युवा सितारे। इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेसी को पूरे मैच में रोकना लगभग नामुमकिन है। उन्हें थोड़ा सा भी स्पेस मिल जाए तो वे अकेले अपने अनुभव और फुटबॉल समझ से मैच की तस्वीर बदल सकते हैं।