18 June 2026 Fact Recorder
National Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा में लंबे समय से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों (PSO) को अचानक हटाकर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई, जिसे ममता बनर्जी ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
जानकारी के अनुसार, देर रात जारी एक प्रशासनिक आदेश के बाद ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात पांच पीएसओ को उनके मूल यूनिट में वापस भेज दिया गया। उनकी जगह चार नए पीएसओ तैनात किए गए थे, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें लेने से मना कर दिया। बताया जा रहा है कि हटाए गए अधिकारियों में कुसुम द्विवेदी और स्वरूप गोस्वामी जैसे अधिकारी शामिल थे, जो लंबे समय से उनकी सुरक्षा टीम का हिस्सा रहे हैं।
इस घटनाक्रम पर टीएमसी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया। पार्टी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मियों को हटाना कोई सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि ममता बनर्जी को असहज और असुरक्षित बनाने की कोशिश है। टीएमसी ने इस मामले को लेकर सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।
हालांकि, ममता बनर्जी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत उनके साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, हालिया बदलाव केवल कुछ निजी सुरक्षा अधिकारियों के स्तर पर किए गए हैं।
जानकारों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था समय-समय पर खतरे के आकलन और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर बदली जाती है। फिलहाल इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।













