August 30,2026 Fact Recorder
International Desk: नेपाल की त्रिशूली घाटी में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दादाबी की सतर्कता और समय पर लिए गए फैसले ने 1,643 बच्चों और लगभग पूरे स्कूल स्टाफ की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।
घटना उस समय की है जब स्कूल की पहली शिफ्ट में करीब 900 बच्चे कक्षाओं में मौजूद थे, जबकि लगभग 700 अन्य छात्र पैदल और बसों के जरिए स्कूल पहुंच रहे थे। इसी दौरान प्रिंसिपल को नदी के बहाव की दिशा में करीब पांच मील ऊपर स्थित बेत्रावती से एक दोस्त का फोन आया।
दोस्त ने फोन पर बताया कि बेत्रावती में भारी तबाही मची है और नदी का पानी गांव में घुसने के साथ काफी नुकसान हुआ है। हालात की गंभीरता को समझते हुए प्रिंसिपल ने बिना देर किए स्कूल और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए।
बस चालकों को तुरंत लौटने के निर्देश
प्रिंसिपल को जानकारी थी कि स्कूल की कई बसें अभी रास्ते में थीं और प्रत्येक बस में करीब 80 बच्चे सवार थे। उन्होंने तत्काल बस चालकों से संपर्क किया और उन्हें सुरक्षित स्थान की ओर वापस लौटने के निर्देश दिए।
इसी दौरान एक बस पुल की ओर बढ़ती दिखाई दी। प्रिंसिपल ने बस चालक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। उस समय तक बाढ़ का पानी स्कूल के खेल मैदान तक पहुंच चुका था और नदी का बहाव बेहद तेज हो गया था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रिंसिपल ने बस चालक को आवाज देकर वापस लौटने के लिए कहा। बस के पुल पार करने के कुछ ही पल बाद पुल अचानक ढह गया।
कुछ सेकंड की देरी पड़ सकती थी भारी
अगर बस कुछ और समय पुल पर रुक जाती तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था। समय रहते लिए गए फैसले से बस में सवार बच्चे सुरक्षित बच गए। वहीं, अन्य बसों को भी वापस लौटने के निर्देश दिए जाने से बड़ी संख्या में छात्रों को खतरे वाले रास्ते से दूर किया जा सका।
प्रिंसिपल की सतर्कता और त्वरित निर्णय ने संभावित त्रासदी को टाल दिया। इस घटना ने प्राकृतिक आपदा के दौरान समय पर सूचना मिलने, हालात को तुरंत समझने और बिना देरी के निर्णय लेने की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है।













