590 करोड़ के IDFC FIRST Bank घोटाले में बड़ा खुलासा, 200 संदिग्ध लेनदेन जांच के घेरे में

21 अप्रैल 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

Chandigarh Desk:  Central Bureau of Investigation की जांच में IDFC FIRST Bank से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले में 200 से ज्यादा संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। जांच एजेंसी को शक है कि इस रकम का इस्तेमाल आरोपियों ने जमीन, मकान और दूसरी संपत्तियां खरीदने में किया।

जांच में पता चला है कि सरकारी अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करके चेक और डेबिट नोट जारी किए गए। कागजों में पैसा बैंक की एफडी में दिखाया गया, लेकिन असल में रकम खातों से निकाल ली गई। सीबीआई अब उन बैंक कर्मचारियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इन डेबिट नोट्स को मंजूरी दी।

आरोपियों ने पूछताछ में यह भी माना है कि उन्होंने कुछ असली वेंडरों को भी सरकारी खातों से भुगतान किया था। ऐसा इसलिए किया गया ताकि ऑडिट के दौरान खाता सामान्य दिखे और किसी को घोटाले का शक न हो।

मुख्य आरोपी Ribhav Rishi ने पूछताछ में कुछ ऐसे बिचौलियों के नाम बताए हैं जिनका सचिवालय में नियमित आना-जाना था। सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन लोगों ने अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया या फिर कोई अधिकारी सीधे इस पूरे नेटवर्क की मदद कर रहा था।

जांच एजेंसी को आरोपी Swati और Abhay Kumar के मोबाइल और लैपटॉप से कई अहम सबूत मिले हैं। इन उपकरणों से फर्जी ईमेल, दस्तावेज और शेल कंपनियों से जुड़ी जानकारी बरामद हुई है। सीबीआई का मानना है कि घोटाले की पूरी डिजिटल योजना इन्हीं के पास थी।

इसके अलावा Abhishek Singla और अन्य आरोपियों ने पैसे को सीधे अपने पास रखने के बजाय अलग-अलग कंपनियों और लोगों के खातों में भेजा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि रकम का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

सीबीआई ने सभी आरोपियों से स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने एक-दूसरे के खिलाफ बयान दिए और बताया कि किसका काम बैंक से खाते खुलवाना था, किसका काम फर्जी कागजात बनाना था और किस तरह रकम का बंटवारा हुआ।

मामले में Ribhav Rishi को अदालत ने दो दिन की अतिरिक्त रिमांड पर भेजा है। बाकी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब सीबीआई डिजिटल सबूतों और व्हाट्सएप चैट के आधार पर आगे की जांच करेगी।