15 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
National Desk: अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक नया एफिडेविट दाखिल कर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने दावा किया है कि जस्टिस शर्मा के बेटे और बेटी दोनों केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और उन्हें मामले तुषार मेहता के जरिए आवंटित होते हैं।
केजरीवाल के अनुसार, दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई की ओर से तुषार मेहता ही पेश हो रहे हैं। उनका तर्क है कि जब जस्टिस शर्मा के बच्चों का पेशेवर संबंध उसी व्यक्ति से हो, जो इस केस में उनके खिलाफ बहस कर रहा है, तो “हितों के टकराव” की आशंका पैदा होती है और ऐसे में जज को मामले से अलग हो जाना चाहिए।
ताजा हलफनामे में केजरीवाल ने कहा कि उन्हें ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे पता चलता है कि जस्टिस शर्मा का बेटा सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार के “ग्रुप ए” पैनल वकील हैं, जबकि उनकी बेटी “ग्रुप सी” पैनल में हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय में भी केंद्र की ओर से पेश होती हैं। उन्होंने विधि मंत्रालय की वेबसाइट का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के पैनल वकीलों को मामले आमतौर पर सॉलिसिटर जनरल की ओर से सौंपे जाते हैं।
यह नया एफिडेविट उस समय आया है जब केजरीवाल पहले ही जस्टिस शर्मा को मामले से हटाने की मांग कर चुके हैं। इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल रही और जज कुछ ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हुईं, जिन्हें वह एक खास वैचारिक धारा से जुड़ा मानते हैं। जस्टिस शर्मा ने फिलहाल खुद को मामले से अलग करने की मांग पर फैसला सुरक्षित रखा है













