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परमाणु कार्यक्रम की जिद से बढ़ी ईरान की मुश्किलें, अब दवाइयों की भी पड़ी भारी कमी

ईरान में गहराता दवा संकट: परमाणु कार्यक्रम की जिद अब जनता पर पड़ रही भारी  ईरान इस समय गहरे संकट से गुजर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के फिर

27 अक्टूबर 2025 फैक्ट रिकॉर्डर

International Desk: ईरान में गहराता दवा संकट: परमाणु कार्यक्रम की जिद अब जनता पर पड़ रही भारी  ईरान इस समय गहरे संकट से गुजर रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के फिर से लगाए गए प्रतिबंधों के बाद देश में दवाइयों की भारी कमी देखने को मिल रही है। विदेशी मुद्रा की किल्लत और आपूर्ति श्रृंखला पर असर के चलते विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च 2026 तक हालात और बिगड़ सकते हैं।

दवा उद्योग पर संकट की दस्तक
ईरान के दवा उद्योग विशेषज्ञ मोजतबा सरकंदी ने अखबार एतेमाद से बातचीत में बताया कि 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक दवा क्षेत्र की विदेशी मुद्रा जरूरतों और सरकार के आवंटन के बीच बड़ा अंतर बढ़ता जा रहा है। 28 सितंबर को यूएन के प्रतिबंध लागू होने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि देश की 99% दवाएं घरेलू स्तर पर तैयार होती हैं, लेकिन ज्यादातर कच्चा माल — जैसे एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट (API) और आवश्यक केमिकल — चीन और भारत जैसे देशों से आयात किए जाते हैं। प्रतिबंधों के कारण बैंकिंग और बीमा सेवाएं ठप पड़ने से दवा आयात बेहद मुश्किल हो गया है।

अस्पतालों में बढ़ी जीवनरक्षक दवाओं की कमी
मानवीय वस्तुओं को प्रतिबंध से छूट तो है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय भुगतान और परिवहन ठप पड़ने से जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति रुक गई है। इसका असर खासकर कैंसर, मल्टिपल स्क्लेरोसिस और दुर्लभ बीमारियों के मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें अब या तो इलाज टालना पड़ रहा है या फिर काले बाजार से दवाएं महंगे दामों में खरीदनी पड़ रही हैं।

फंड की कमी और बढ़ती लागत
सरकार ने दवाओं और मेडिकल उपकरणों के लिए इस साल 3.4 अरब डॉलर का बजट तय किया था, लेकिन विदेशी मुद्रा की उपलब्धता में 20% तक की गिरावट आ चुकी है। सरकंदी के अनुसार, शिपिंग और बीमा की लागत 30–50% बढ़ गई है, जबकि बैंकिंग चैनल ठप पड़ने से आयात का समय दोगुना हो गया है।

कैंसर और बायोटेक दवाओं पर सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट 2012 और 2018 जैसे दौर को दोहरा सकता है, जब कैंसर और बायोटेक दवाओं की गंभीर कमी हो गई थी। स्थानीय निर्माता सीमित कच्चे माल और सरकारी मूल्य नियंत्रण (Price Caps) के कारण भारी नुकसान झेल रहे हैं।

सरकारी नीतियों पर भी उठे सवाल
उद्योग के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस संकट के पीछे केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि सरकारी गलत नीतियां भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा — “लगभग 40% संकट प्रतिबंधों की वजह से है, बाकी 60% सरकार की देरी, अपारदर्शिता और गलत मूल्य नीति का परिणाम है।”

स्थिति और बिगड़ने की आशंका
हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवा क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता का आश्वासन दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दवाओं के लिए विशेष भुगतान चैनल नहीं बनाए गए, तो आने वाले महीनों में संकट और गहराएगा।

यूएन प्रतिबंधों के तहत ईरान पर फिर से हथियारों, मिसाइलों, संपत्ति फ्रीज और यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए हैं। पहले से आर्थिक मंदी झेल रहे ईरान के लिए यह झटका उसकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों दोनों पर भारी पड़ रहा है।