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भारत-UK ट्रेड डील 15 जुलाई से लागू: व्हिस्की होगी सस्ती, टेक्सटाइल-आईटी समेत भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा फायदा

14 July 2026 Fact Recorder

Business Desk: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस डील से आने वाले वर्षों में भारत और UK के बीच द्विपक्षीय व्यापार में करीब 25.5 बिलियन पाउंड तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

भारत में सस्ते होंगे कई ब्रिटिश उत्पाद

समझौते के लागू होने के बाद स्कॉच व्हिस्की, जिन, चॉकलेट, बिस्कुट, कॉस्मेटिक्स और कई अन्य ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी आएगी। इससे इन उत्पादों की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है।

स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150% आयात शुल्क घटाकर पहले 75% किया जाएगा और अगले 10 वर्षों में इसे 40% तक लाया जाएगा। वहीं, ब्रिटेन से आयात होने वाली कारों पर भी कोटा प्रणाली के तहत टैरिफ धीरे-धीरे घटाकर 110% से 10% तक किया जाएगा।

भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेगा बड़ा बाजार

इस ट्रेड डील के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और उन्हें ब्रिटिश बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।

विशेष रूप से टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा, फुटवियर, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स और खिलौना उद्योग को इस समझौते का बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

IT प्रोफेशनल्स और कर्मचारियों को भी राहत

समझौते के साथ डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन भी लागू होगा। इससे UK में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को दोनों देशों में सोशल सिक्योरिटी योगदान देने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे कर्मचारियों की बचत बढ़ेगी और उनका भविष्य निधि (PF) खाता भी मजबूत होगा।

दोनों देशों के व्यापार में लगातार बढ़ोतरी

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत और UK के बीच वस्तु व्यापार वर्ष 2025-26 में बढ़कर 25.13 बिलियन डॉलर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान ब्रिटेन से आयात में तेज वृद्धि के कारण भारत का व्यापार अधिशेष घटकर 1.76 बिलियन डॉलर रह गया।

कृषि क्षेत्र को दी गई सुरक्षा

भारत ने डेयरी उत्पाद, सेब, चीज, चीनी, चावल, पोर्क, चिकन और अंडों जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते में टैरिफ रियायतों से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य घरेलू किसानों और कृषि क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षित रखना है।

स्टील और CBAM पर रहेगी नजर

हालांकि अधिकांश क्षेत्रों को इस समझौते का लाभ मिलेगा, लेकिन स्टील निर्यातकों को कोटा प्रणाली और ब्रिटेन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। CBAM 1 जनवरी 2027 से लागू होगा और स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक तथा हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल ट्रेड, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा, सरकारी खरीद, नवाचार और सेवा क्षेत्र में भी भारत और UK के बीच सहयोग को मजबूत करेगा।