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सर्वाइकल कैंसर: क्या 2048 तक खत्म हो सकता है यह खतरा? जानें भारत में कितनी कम हो सकती है बीमारी

August 27,2026 Fact Recorder

Health Desk:  सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसर में शामिल है और दुनियाभर में हर साल लाखों महिलाएं इससे प्रभावित होती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते एचपीवी टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग को अपनाकर इस बीमारी के मामलों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मानव पेपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण को सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, सर्वाइकल कैंसर के करीब 99 फीसदी मामले एचपीवी संक्रमण से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि एचपीवी वैक्सीन को इस कैंसर की रोकथाम में अहम हथियार माना जाता है।

2048 तक खत्म हो सकता है सर्वाइकल कैंसर?

एक अध्ययन में अलग-अलग टीकाकरण और स्क्रीनिंग रणनीतियों के प्रभाव का आकलन किया गया। इसके मुताबिक, उच्च आय वाले देशों में बेहतर टीकाकरण और स्क्रीनिंग व्यवस्था के चलते आने वाले दशकों में सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

वहीं, कम और मध्यम आय वाले देशों में अभी भी टीकाकरण और स्क्रीनिंग की पर्याप्त पहुंच नहीं होने के कारण चुनौती बनी हुई है। अध्ययन के मॉडल के अनुसार, अगर मौजूदा स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं किया गया तो इन देशों में कैंसर की दर में अपेक्षित कमी नहीं आ पाएगी।

90 फीसदी टीकाकरण से बदल सकती है तस्वीर

शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर लड़कियों में एचपीवी टीकाकरण की कवरेज 90 फीसदी तक पहुंचाई जाए तो कई देशों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों को खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के लिए 90-70-90 लक्ष्य तय किया है। इसके तहत 90 फीसदी लड़कियों को 15 वर्ष की उम्र तक एचपीवी वैक्सीन देने, 70 फीसदी महिलाओं की तय उम्र तक उच्च गुणवत्ता वाली स्क्रीनिंग करने और 90 फीसदी जरूरतमंद महिलाओं को उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

भारत में कितनी कमी आ सकती है?

भारत के संदर्भ में लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित एक पूर्व अध्ययन के अनुसार, यदि देश में 90 फीसदी कवरेज के साथ सिंगल-डोज एचपीवी टीकाकरण प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो सर्वाइकल कैंसर के मामलों में लगभग 78 फीसदी तक की कमी आ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले टीकों की उपलब्धता बढ़ाना, सिंगल-डोज वैक्सीनेशन को प्रभावी ढंग से लागू करना और नियमित स्क्रीनिंग को मजबूत करना भारत में इस बीमारी के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

बचाव के लिए जागरूकता जरूरी

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में एचपीवी वैक्सीन के साथ नियमित स्क्रीनिंग भी बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआती स्तर पर बीमारी या उसके जोखिम का पता चलने पर समय पर उपचार की संभावना बेहतर रहती है। इसलिए टीकाकरण, स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देना इस कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी रणनीतियों में शामिल है।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और शोध संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी टीके या स्क्रीनिंग से संबंधित निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लें।