16 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर
Health Desk: मौसम में अचानक बदलाव होने पर शरीर को नई परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने में समय लगता है। दिन में तेज गर्मी और शाम को ठंडक के कारण सर्दी, खांसी, एलर्जी, वायरल बुखार और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस समय शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बिगड़ने लगता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए। फल, दलिया, खिचड़ी, सूप और घर का ताजा खाना शरीर के लिए फायदेमंद रहता है। पपीता, संतरा, अनार और आंवला जैसे फल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।
बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और फास्ट फूड खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन बिगड़ सकता है और कफ-पित्त बढ़ सकता है। आयुर्वेद में इस समय ठंडे पानी की जगह सामान्य या हल्का गुनगुना पानी पीने की सलाह दी जाती है। इससे पाचन बेहतर रहता है और गले तथा सांस से जुड़ी परेशानियां कम होती हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तुलसी, अदरक, गिलोय और अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का सेवन फायदेमंद माना जाता है। तुलसी-अदरक की चाय या हल्दी वाला दूध शरीर को संक्रमण से बचाने और गले को आराम देने में मदद कर सकता है।
इस मौसम में दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचें। बाहर जाते समय सिर ढकें, पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाएं। मौसम बदलने पर शरीर जल्दी थक सकता है, इसलिए पर्याप्त नींद और आराम भी जरूरी है।
अगर लगातार बुखार, सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी या कमजोरी महसूस हो, तो घरेलू उपायों के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। बदलते मौसम में छोटी लापरवाही भी बड़ी परेशानी बन सकती है।













