22 May 2026 Fact Recorder
International Desk: अमेरिका ने चीन के खिलाफ अपनी सख्त रणनीति को और तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी संसद में दो रिपब्लिकन सांसदों ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य चीन के सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों और व्यक्तियों पर तेजी से प्रतिबंध लगाना है।
यह विधेयक ‘सीसीपी सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट’ नाम से पेश किया गया है। इसे रिपब्लिकन सीनेटर Rick Scott और प्रतिनिधि Elise Stefanik ने अमेरिकी संसद में रखा। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ एक साल के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है।
इस विधेयक का मकसद वित्त वर्ष 2026 के नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट में संशोधन करना है। इसके जरिए ट्रेजरी विभाग के लिए समय सीमा तय की जाएगी, ताकि संदिग्ध चीनी संस्थाओं को ‘नॉन-एसडीएन चीनी सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स कंपनियों’ की सूची में अनिवार्य रूप से शामिल किया जा सके।
फिलहाल अमेरिका में ऐसा कोई नियम नहीं है, जो ट्रेजरी विभाग को तय समय में कार्रवाई करने के लिए बाध्य करे। मौजूदा व्यवस्था के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति हर दो साल में उन चीनी संस्थाओं और व्यक्तियों की रिपोर्ट पेश करते हैं, जिन्हें अमेरिका अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। हालांकि, प्रतिबंध लगाने या सूची अपडेट करने की कोई निश्चित समय सीमा नहीं है।
नए प्रस्तावित कानून के अनुसार, राष्ट्रपति की रिपोर्ट आने के एक साल के भीतर ट्रेजरी सचिव को संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों को प्रतिबंध सूची में डालना होगा और संशोधित सूची को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित करना होगा।
सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि जो संस्थाएं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सैन्य हितों को बढ़ावा देती हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब चीन के बढ़ते प्रभाव और सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
वहीं एलिस स्टेफानिक ने कहा कि यह विधेयक चीन पर आर्थिक निर्भरता कम करने और अमेरिकी सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इससे ट्रेजरी विभाग संदिग्ध चीनी कंपनियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर सकेगा।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच इस विधेयक को बेहद अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि यह कानून पास होता है तो चीन की कई बड़ी कंपनियों पर अमेरिका में कारोबार करना मुश्किल हो सकता है।













