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महंगा होने के बावजूद यूपी वालों का सोने से नहीं टूटा मोह, हर साल 100 टन तक बनी रहती है मांग

22 May 2026 Fact Recorder

Business Desk:  Uttar Pradesh में सोने की बढ़ती कीमतें भी लोगों का आकर्षण कम नहीं कर पा रही हैं। आयात शुल्क में कई बार बढ़ोतरी होने के बावजूद प्रदेश में सोने की खरीद लगातार जारी है। शादी-ब्याह, बचत और निवेश के चलते हर साल करीब 100 टन सोने की मांग बनी रहती है।

सराफा कारोबारियों के मुताबिक, यूपी देश की कुल सोना खपत में लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। Lucknow, Kanpur, Varanasi, Meerut, Agra, Mathura, Noida और Gorakhpur प्रदेश के प्रमुख सराफा बाजारों में शामिल हैं।

ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव नितिन केडिया के अनुसार, भारत में सोने पर आयात शुल्क लगातार बढ़ाया गया, लेकिन मांग पर इसका स्थायी असर नहीं पड़ा। 2024 में शुल्क घटाकर 6 प्रतिशत किए जाने के बाद सोने का आयात तेजी से बढ़ा था, जबकि अब इसे फिर करीब 15 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब ग्राहक भारी गहनों की बजाय हल्के डिजाइन, 18 कैरेट ज्वैलरी और पुराने गहनों के एक्सचेंज मॉडल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे महंगे सोने के बावजूद खरीदारी का ट्रेंड बना हुआ है।

निवेश के क्षेत्र में भी सोना लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। निवेश सलाहकारों के मुताबिक, देश में गोल्ड ETF निवेशकों की संख्या 1.24 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, जिनमें 20 लाख से अधिक निवेशक यूपी से हैं। वर्ष 2025 में गोल्ड ETF में लगभग 43 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जिसमें यूपी की हिस्सेदारी करीब 6200 करोड़ रुपये रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में, खासकर यूपी में, सोना सिर्फ गहना नहीं बल्कि सुरक्षित निवेश और बचत का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता है। यही वजह है कि कीमतें बढ़ने और टैक्स ज्यादा होने के बावजूद इसकी मांग लगातार बनी हुई है।