Home Hindi इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: धर्मांतरण कानून के तहत झूठी FIR...

इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: धर्मांतरण कानून के तहत झूठी FIR का बढ़ता चलन चिंताजनक

16 अप्रैल, 2026 फैक्ट रिकॉर्डर

National Desk:  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत दर्ज की जा रही कथित झूठी FIR पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि 2021 में बने गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के तहत लगातार बड़ी संख्या में मामले दर्ज हो रहे हैं, लेकिन बाद में इनमें से कई आरोप गलत साबित हो रहे हैं। अदालत ने इसे “चिंताजनक ट्रेंड” बताया।

मामला बहराइच जिले में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग शिकायतकर्ता की 18 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर ले गए और उसका धर्म परिवर्तन कराकर शादी के लिए दबाव बना रहे हैं। इस FIR को रद्द कराने के लिए मोहम्मद फैजान और अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान पीड़िता का बयान अदालत के सामने रखा गया। उसने कहा कि वह पिछले तीन वर्षों से अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता के साथ रिश्ते में है। उसने धर्म परिवर्तन, जबरन शादी और किसी भी तरह के दबाव के आरोपों से साफ इनकार किया। पीड़िता ने यह भी कहा कि वह याचिकाकर्ता के साथ रहना चाहती है और कुछ संगठनों द्वारा उसे और उसके परिवार को परेशान किया जा रहा है।

इसके बावजूद जांच अधिकारी ने केवल रेप की धारा हटाई और अपहरण, हमला तथा धर्मांतरण कानून की धाराओं में जांच जारी रखी। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पीड़िता के बयान से FIR के आरोप झूठे साबित हो गए, तब आगे की जांच का कोई औचित्य नहीं बचता।

जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया है कि वे 19 मई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताएं कि ऐसे झूठे मामलों पर सरकार क्या कार्रवाई कर रही है।

अदालत ने शिकायतकर्ता, जो पीड़िता का पिता है, को भी अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि उसके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत FIR दर्ज कराने के लिए कार्रवाई क्यों न की जाए।

फिलहाल, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि तीन दिनों के भीतर याचिकाकर्ताओं, पीड़िता और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।