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पंजाब में 8वीं से 12वीं तक शुरू होगी AI की पढ़ाई, 1 सितंबर से लागू करने की तैयारी; निजी स्कूलों में ₹100 मासिक फीस का प्रस्ताव

August 19,2026 Fact Recorder

Chandigarh Desk:  पंजाब में कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शिक्षा देने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित योजना को 1 सितंबर 2026 से शुरू करने की बात सामने आई है। इसके तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए AI शिक्षा मुफ्त रखने का प्रस्ताव है, जबकि PSEB से संबद्ध निजी स्कूलों में विद्यार्थियों से ₹100 प्रति माह शुल्क लेने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को करीब 35 से 40 मिनट की ऑनलाइन क्लास के माध्यम से AI से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे। योजना के संचालन में सिंगापुर की एक निजी कंपनी की भूमिका होने की जानकारी सामने आई है। बोर्ड को उम्मीद है कि कक्षा 8वीं से 12वीं तक के करीब 80 प्रतिशत विद्यार्थी इस कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं।

रजिस्ट्रेशन और परीक्षा के लिए अलग शुल्क का प्रस्ताव

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ‘सरबत AI पोर्टल’ के जरिए कराया जाएगा। मासिक शुल्क के अलावा साल में तीन बार होने वाली परीक्षाओं के लिए ₹50, यूनिट टेस्ट के लिए ₹10 और किताब के लिए ₹73 प्रति विद्यार्थी शुल्क प्रस्तावित किए जाने की जानकारी है।

हर स्कूल के दो शिक्षकों को मिलेगी AI ट्रेनिंग

AI शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रत्येक स्कूल से दो शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की योजना है। शिक्षकों के लिए चार सप्ताह की ट्रेनिंग प्रस्तावित है। पहले साल में एक शिक्षक की ट्रेनिंग के लिए करीब ₹800 शुल्क और तीन साल की अवधि में लगभग ₹21,000 खर्च होने की बात सामने आई है।

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए डिजिटल सुविधाओं की चुनौती

योजना को लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी एक अहम मुद्दा बना हुआ है। ऑनलाइन कक्षाओं और घर पर सेल्फ स्टडी के लिए विद्यार्थियों को मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट जैसी सुविधाओं की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में उन विद्यार्थियों के सामने परेशानी आ सकती है, जिनके पास पर्याप्त डिजिटल संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।

सत्र के बीच योजना शुरू करने पर सवाल

शैक्षणिक सत्र शुरू होने के करीब पांच महीने बाद सितंबर से AI की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी को लेकर भी कुछ शिक्षकों और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि नई ऑनलाइन कक्षाओं से विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ सकता है।

शिक्षकों और अभिभावकों के एक वर्ग ने योजना लागू करने से पहले फीस, डिजिटल सुविधाओं, शिक्षक प्रशिक्षण और विद्यार्थियों की समान पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि AI शिक्षा भविष्य के लिए उपयोगी कदम हो सकती है, लेकिन इसे लागू करने से पहले जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।