1 August 2026 Fact Recorder
National Desk: उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान बढ़ती नमी और अनुकूल मौसम को देखते हुए चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने गन्ना किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने किसानों से फसल का नियमित निरीक्षण करने और रोगों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उपचार करने की अपील की है।
विभाग की ओर से जारी सलाह में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों ने गन्ने में होने वाले प्रमुख रोगों जैसे लाल सड़न (रेड रॉट), पोक्का बोइंग, बैक्टीरियल टॉप रॉट और मुरझा (विल्ट) के लक्षण और उनके नियंत्रण के उपाय बताए हैं।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में व्यापक रूप से बोई जाने वाली को. 0238 और को. 05011 किस्मों में यदि लाल सड़न के लक्षण दिखाई दें तो संक्रमित पौधों को जड़ सहित तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें। साथ ही वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशकों का प्रयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि संक्रमित खेत का पानी दूसरे खेतों में न जाने दें और जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें, ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके।
एडवाइजरी के अनुसार यदि फसल में पोक्का बोइंग रोग दिखाई दे तो 15 दिन के अंतराल पर दो बार कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या कार्बेन्डाजिम के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। समय पर उपचार से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सकता है।
विभाग ने मुरझा (विल्ट) रोग की रोकथाम के लिए खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखने, सल्फर, जिंक सल्फेट और बोरेक्स का संतुलित मात्रा में उपयोग करने की सलाह दी है। इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।
गन्ना विकास विभाग ने किसानों से रासायनिक उपायों के साथ जैविक कीटनाशकों (बायोपेस्टीसाइड) के उपयोग पर भी जोर दिया है, ताकि पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सके।
विभाग ने अपील की है कि यदि फसल में रोग तेजी से फैलता दिखाई दे तो किसान तुरंत स्थानीय गन्ना विभाग के अधिकारियों या कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें। समय पर रोगों की पहचान, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर गन्ने की गुणवत्ता, उत्पादन और किसानों की आय को सुरक्षित रखा जा सकता है।













