August 29,2026 Fact Recorder
चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने संवैधानिक पद की गरिमा और प्रशासनिक मर्यादा का उदाहरण पेश करते हुए सरकार की ओर से आवंटित सरकारी आवास को स्वीकार करने से विनम्रता से इनकार कर दिया है। सरकार ने उनके 70 साल से अधिक पुराने पैतृक मकान के पुनर्निर्माण को देखते हुए अस्थायी आवास के तौर पर मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स में हाउस नंबर-2 आवंटित किया था।
हरविंद्र कल्याण मूल रूप से कुटेल गांव के रहने वाले हैं। जीटी रोड स्थित उनका पैतृक आवास ‘कल्याण फार्म’ करीब सात दशक पुराना है। मकान का ढांचा जर्जर होने के कारण इसके पुनर्निर्माण की आवश्यकता है। निर्माण कार्य में लगभग एक वर्ष लगने की संभावना को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के समक्ष वैकल्पिक आवास की व्यवस्था का अनुरोध किया था।
पुलिस कॉम्प्लेक्स में रहने से किया इनकार
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की थी। हालांकि, हरविंद्र कल्याण ने पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स में आवंटित मकान को स्वीकार करने में असमर्थता जताई।
उनका कहना है कि पुलिस कॉम्प्लेक्स मुख्य रूप से पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की गतिविधियों तथा प्रशासनिक कार्यों के लिए निर्धारित है। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष के वहां रहने से सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ी अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं, जिससे परिसर की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होने की संभावना रहेगी।
सरकारी सुविधा से पहले संस्थागत व्यवस्था
हरविंद्र कल्याण के इस फैसले को उनकी कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन में प्रशासनिक मर्यादा को दिए जाने वाले महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने व्यक्तिगत सुविधा के बजाय संस्थागत व्यवस्था और पुलिस विभाग के अनुशासन को प्राथमिकता दी है।
उनका मानना है कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए पुलिस कॉम्प्लेक्स में आवास की व्यवस्था भविष्य में एक ऐसी परंपरा का रूप नहीं लेनी चाहिए, जिससे विभाग की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हो। इसी वजह से उन्होंने उपलब्ध कराए गए आवास को स्वीकार करने के बजाय अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की इच्छा जताई है।
‘मेरे कारण किसी को असुविधा न हो’
हरविंद्र कल्याण ने संबंधित स्तर पर यह भी स्पष्ट किया कि उनके वहां रहने से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके पद के अनुरूप अतिरिक्त प्रोटोकॉल या व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती हैं। वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से पुलिस कॉम्प्लेक्स की नियमित व्यवस्था पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव पड़े।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह लगातार तीसरी बार घरौंदा विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अब हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सदन की कार्यवाही की महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
‘कल्याण फार्म’ से जुड़ी है परिवार की पुरानी विरासत
कुटेल स्थित ‘कल्याण फार्म’ हरविंद्र कल्याण के परिवार की पुरानी विरासत से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि यह मकान करीब 1950 के आसपास उनके पिता स्वर्गीय देवी सिंह रोड ने बनवाया था। परिवार का कुटेल गांव से 125 वर्षों से अधिक पुराना जुड़ाव बताया जाता है।
मकान की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसके पुनर्निर्माण की जरूरत है। इसी निर्माण अवधि के दौरान अस्थायी आवास की आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स में आवास उपलब्ध कराया था।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जताया आभार
हरविंद्र कल्याण ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा उनकी आवासीय समस्या को गंभीरता से लेते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करने की पहल के लिए आभार व्यक्त किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मधुबन पुलिस कॉम्प्लेक्स का हाउस नंबर-2 उनके लिए उपयुक्त विकल्प नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम में सरकार और विधानसभा अध्यक्ष के बीच बेहतर समन्वय की तस्वीर भी सामने आती है। सरकार ने उनकी जरूरत को देखते हुए आवास उपलब्ध कराया, जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने यह सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी कि उनकी सुविधा के कारण किसी विभाग की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित न हो।
लगातार तीसरी बार विधायक, अब विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी
हरविंद्र कल्याण घरौंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। लंबे सार्वजनिक और राजनीतिक अनुभव के बाद उन्हें हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। अध्यक्ष के रूप में सदन की कार्यवाही को निष्पक्षता, अनुशासन और संसदीय मर्यादा के अनुरूप संचालित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
सरकारी आवास को लेकर लिया गया उनका यह फैसला भी इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें व्यक्तिगत सुविधा से अधिक संस्थागत मर्यादा और प्रशासनिक अनुशासन को महत्व दिया गया है।
पुनर्निर्माण तक वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश
अब माना जा रहा है कि ‘कल्याण फार्म’ के पुनर्निर्माण के दौरान हरविंद्र कल्याण के लिए किसी अन्य उपयुक्त वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जा सकती है। उनका यह फैसला इस बात का संदेश देता है कि सरकारी सुविधा का उपयोग भी ऐसी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, जिससे संबंधित संस्थान की नियमित कार्यप्रणाली और अनुशासन प्रभावित न हो।













