August 19,2026 Fact Recorder
Health Desk: बारिश के मौसम में डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं। दोनों बीमारियों के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, शरीर में दर्द और कमजोरी जैसी समानताएं होने के कारण कई बार मरीजों के लिए अंतर समझना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, दोनों बीमारियां अलग-अलग तरीके से फैलती हैं और इनके कुछ प्रमुख लक्षण भी अलग होते हैं।
डेंगू और स्वाइन फ्लू कैसे फैलते हैं?
डॉ. आशीष चौधरी के मुताबिक, डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर आमतौर पर दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है और घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनप सकता है। कूलर, गमले, छत पर रखे कंटेनर और निर्माण स्थलों पर जमा पानी इसके लिए अनुकूल जगह बन सकते हैं।
वहीं, स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके संपर्क में आने से फैल सकता है। भीड़भाड़ वाले स्थानों, स्कूलों, कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
डेंगू में आमतौर पर अचानक तेज बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं:
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- कमजोरी और थकान
- प्लेटलेट्स की संख्या में कमी
डेंगू में शरीर में काफी तेज दर्द होने के कारण इसे कई बार ‘हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहा जाता है।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू में बुखार के साथ श्वसन तंत्र से जुड़े लक्षण ज्यादा प्रमुख हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- तेज बुखार
- गले में खराश
- खांसी
- नाक बंद होना या बहना
- शरीर में दर्द
- थकान
- सांस लेने में परेशानी
कई बार शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे लग सकते हैं, जिसकी वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
जांच से होती है सही पहचान
सिर्फ लक्षणों के आधार पर डेंगू और स्वाइन फ्लू में अंतर करना हमेशा आसान नहीं होता। डेंगू की पुष्टि के लिए डॉक्टर स्थिति के अनुसार ब्लड टेस्ट करा सकते हैं, जबकि स्वाइन फ्लू की पहचान के लिए आरटी-पीसीआर जैसी जांच की जाती है।
इसलिए तेज बुखार या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
लापरवाही से बढ़ सकता है खतरा
डेंगू गंभीर होने पर रक्तस्राव और अन्य जटिलताएं पैदा कर सकता है। वहीं, स्वाइन फ्लू गंभीर स्थिति में फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और निमोनिया या सांस लेने में गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।
बुखार को नजरअंदाज न करें
बारिश के मौसम में तेज बुखार को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर बुखार के साथ शरीर में तेज दर्द, त्वचा पर चकत्ते, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और उचित इलाज से गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।













